ट्रंप के 15% टैरिफ से वैश्विक व्यापार में हलचल; भारत-चीन को बढ़त, ब्रिटेन पर दबाव, यूरोप सख्त रुख में

भारत पर पहले टैरिफ 50% तक पहुंच गए थे। बाद में यह घटकर 25% हुए और फिर 18% तक लाए गए। अब नए फैसले के बाद यह 15% हो गया है

ट्रंप का टैरिफ विवाद

ट्रंप का टैरिफ विवाद

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ (शुल्क) को रद्द कर दिया। इसके जवाब में ट्रंप ने पहले सभी देशों पर 10% नया आयात शुल्क लगाया और फिर उसे बढ़ाकर 15% कर दिया। इस फैसले से दुनिया और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में चिंता बढ़ गई है।

भारत और चीन को इससे फायदा होता दिख रहा है, जबकि ब्रिटेन को नुकसान हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

United States Supreme Court ने कहा कि ट्रंप ने जिस कानून (International Emergency Economic Powers Act) के तहत टैरिफ लगाए थे, उसका इस्तेमाल सही तरीके से नहीं किया गया था। इसलिए कई पुराने टैरिफ रद्द कर दिए गए।

फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने नया 10% टैरिफ घोषित कर दिया, जिसे बाद में 15% तक बढ़ा दिया गया।

भारत और चीन को फायदा

भारत पर पहले टैरिफ 50% तक पहुंच गए थे। बाद में यह घटकर 25% हुए और फिर 18% तक लाए गए। अब नए फैसले के बाद यह 15% हो गया है। हालांकि 15% भी एक शुल्क है, लेकिन यह पहले के मुकाबले कम है। इसलिए भारत को कुछ राहत मिली है।

चीन

China ने कहा है कि वह अमेरिका के नए कदमों पर नजर रख रहा है। चीन ने यह भी कहा कि व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता और एकतरफा टैरिफ सही रास्ता नहीं है।

चीन पर पहले फेंटेनिल से जुड़े 10% अतिरिक्त शुल्क भी लगाए गए थे, जिन्हें अदालत ने हटा दिया है। इससे चीन को भी राहत मिली है।

ब्रिटेन को बड़ा झटका

United Kingdom को पहले 10% का अपेक्षाकृत कम टैरिफ मिल रहा था, जिससे उसे फायदा था। लेकिन अब सभी देशों के लिए 15% टैरिफ लागू होने से ब्रिटेन को ज्यादा नुकसान हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे ब्रिटेन की कंपनियों पर करीब 3 अरब पाउंड (लगभग 4 अरब डॉलर) का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है और करीब 40,000 कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं।

ब्रिटिश सरकार अमेरिका से अपील कर रही है कि उसे इस बढ़े हुए टैरिफ से बाहर रखा जाए।

यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया

European Commission ने कहा है कि अमेरिका को पिछले साल हुए व्यापार समझौते का पालन करना चाहिए। उनका कहना है, “समझौता तो समझौता होता है।”

पिछले साल यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें ज्यादातर यूरोपीय वस्तुओं पर अधिकतम 15% टैरिफ तय किया गया था।

क्या यूरोप समझौता रोक सकता है?

यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष Bernd Lange ने कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी नई व्यापार नीति का पूरा विवरण और कानूनी स्थिति साफ नहीं करता, तब तक इस समझौते की मंजूरी की प्रक्रिया रोकने का प्रस्ताव रखा जाएगा।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप के नए 15% टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है। भारत और चीन को कुछ राहत मिली है, जबकि ब्रिटेन और यूरोप के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

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