चिकन नेक में अंडरग्राउंड रेल कनेक्टिविटी: हकीकत या सिर्फ योजना?

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह एक रणनीतिक परियोजना है। उन्होंने बताया कि यहाँ ट्रैक को चार लाइन का बनाया जाएगा और नया रेलवे लाइन जमीन से करीब 20–24 मीटर नीचे बनेगा।

चिकन नेक भारत की एक पतली ज़मीन की पट्टी है

चिकन नेक भारत की एक पतली ज़मीन की पट्टी है

भारत अब अपने सबसे संवेदनशील रेलवे इलाके में से एक को जमीन के नीचे ले जाने की योजना बना रहा है। यह इलाका पश्चिम बंगाल में चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नाम से जाना जाता है और इसकी लंबाई करीब 40 किलोमीटर है। सरकार की योजना है कि यहां अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बनाया जाए ताकि देश के पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला यह एकमात्र ज़मीनी रास्ता सुरक्षित रहे।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह एक रणनीतिक परियोजना है। उन्होंने बताया कि यहाँ ट्रैक को चार लाइन का बनाया जाएगा और नया रेलवे लाइन जमीन से करीब 20–24 मीटर नीचे बनेगा।

चिकन नेक क्यों महत्वपूर्ण है?

चिकन नेक भारत की एक पतली ज़मीन की पट्टी है, जो देश के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर से जोड़ती है।

अंडरग्राउंड रेल बनाना मुश्किल है या आसान?

पहली नज़र में यह योजना कठिन लगती है क्योंकि:

लेकिन नई सुरंग बनाने की तकनीक और भारत का अनुभव इसे संभव बनाता है।

अंडरग्राउंड रेल से क्या फायदा होगा?

अभी इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?

भारत की तैयारी

निष्कर्ष

सिलीगुड़ी कॉरिडोर में अंडरग्राउंड रेलवे सिर्फ एक विकास योजना नहीं है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जो इलाका अब तक कमजोरी माना जाता था, उसे अब मजबूत और सुरक्षित जीवनरेखा में बदला जा रहा है।

Exit mobile version