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भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर देश में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस समझौते को “संपूर्ण सरेंडर” बताया है। उनका कहना है कि सरकार ने इस डील के जरिए देश के हितों से समझौता किया है और किसानों के साथ विश्वासघात किया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के दबाव में आकर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत का कोई भी प्रधानमंत्री ऐसी डील पर बिना दबाव के हस्ताक्षर नहीं करेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने भाजपा के आर्थिक ढांचे को बचाने के लिए 140 करोड़ भारतीयों के हितों को दांव पर लगा दिया। उनके मुताबिक, इस समझौते से किसानों की आजीविका, कपड़ा उद्योग, देश की ऊर्जा सुरक्षा, डेटा और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को खतरा हो सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि “प्रधानमंत्री ने देश और किसानों को बेच दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाता है या विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जाता है, तो भी उन्हें फर्क नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि उन्होंने संसद में सच बोला है और वे किसानों के साथ खड़े रहेंगे।
दूसरी ओर, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी झूठे और निराधार आरोप लगा रहे हैं और किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। गोयल ने कहा कि राहुल गांधी को देश की चिंता नहीं है और वे केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं।
पीयूष गोयल ने ट्रेड डील का बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हैं। उनके अनुसार, सरकार का हर फैसला किसानों की भलाई और देश की समृद्धि को ध्यान में रखकर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के लिए फायदेमंद है और इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
गोयल ने यह भी कहा कि सरकार ने किसी भी तरह का समझौता किसानों के नुकसान पर नहीं किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर देने के लिए ही यह डील की गई है।
इस तरह, भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष इसे देश और किसानों के खिलाफ बता रहा है, तो दूसरी ओर सरकार इसे देश के विकास और आर्थिक मजबूती की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बता रही है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा और तेज हो सकती है।































