केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि 20 से 25 कांग्रेस सांसदों का एक समूह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में घुस गया, उनका अपमान किया और पिछले सप्ताह सरकार और विपक्ष के बीच हुए टकराव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी दी।
रिजिजू ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना का एक कथित “अवैध रूप से रिकॉर्ड किया गया” वीडियो साझा किया। नौ सेकंड की यह क्लिप दिनभर कई बार अपडेट और दोबारा पोस्ट की गई, जिससे संसद में जारी गतिरोध और सदन के बाहर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाज़ी के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
‘अवैध वीडियो, पीएम को धमकी’
नौ सेकंड की क्लिप साझा करते हुए रिजिजू ने कहा कि यह फुटेज एक कांग्रेस सांसद ने गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया था, जब कई विपक्षी सदस्य अध्यक्ष के कक्ष में दाखिल हुए थे।
उन्होंने X पर लिखा, “यह वह अवैध वीडियो क्लिप है, जिसे एक कांग्रेस सांसद ने उस समय रिकॉर्ड किया जब 20–25 कांग्रेस सांसद माननीय अध्यक्ष के कक्ष में घुसे, उनका अपमान किया और माननीय प्रधानमंत्री को धमकी दी। हमारी पार्टी बहस और चर्चा में विश्वास करती है और कभी भी सांसदों को शारीरिक धमकी देने के लिए प्रोत्साहित नहीं करती।”
वीडियो में लगभग एक दर्जन विपक्षी सांसद अध्यक्ष की मेज के पास इकट्ठा दिखाई दे रहे हैं, जो ऊंची आवाज में बोलते और भाजपा मंत्रियों से बहस करते नजर आते हैं।
रिजिजू ने दावा किया कि क्लिप में कांग्रेस सांसदों को अध्यक्ष के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते और प्रधानमंत्री के खिलाफ धमकी भरी टिप्पणियां करते दिखाया गया है।
पहले भी वीडियो और ‘अपमानजनक व्यवहार’ का आरोप
यह ताज़ा फुटेज उस वीडियो के कुछ दिनों बाद सामने आया है, जिसे रिजिजू ने पोस्ट कर आरोप लगाया था कि विपक्षी सांसदों ने लोकसभा के अंदर “अत्यंत अपमानजनक व्यवहार” किया और स्थिति को लगभग शारीरिक टकराव तक पहुंचा दिया।
उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा सांसदों को हिंसा की स्थिति बनने से रोकने के लिए संयम बरतने को कहा गया था।
विवाद की जड़: राहुल गांधी और ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’
यह टकराव पिछले सप्ताह उस विवाद से जुड़ा है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा Four Stars of Destiny से उद्धरण पढ़ने का प्रयास किया।
इस पुस्तक में 2020 के भारत-चीन सीमा गतिरोध का उल्लेख है। अध्यक्ष ओम बिरला ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए गांधी को सदन में संस्मरण के अंश पढ़ने की अनुमति नहीं दी।
इस निर्णय के बाद विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया और सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
4 फरवरी का विरोध प्रदर्शन
4 फरवरी को कांग्रेस की महिला सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोलने से कुछ मिनट पहले लोकसभा में उनकी सीट के पास इकट्ठा हुईं।
उन्होंने “जो उचित समझो, वहीं करो” लिखा बैनर प्रदर्शित किया, जो नरवणे संस्मरण विवाद से जुड़ा था।
इस विरोध के कारण सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
रिजिजू ने बाद में कहा कि यदि भाजपा सांसदों को प्रदर्शनकारियों से भिड़ने की अनुमति दी जाती, तो स्थिति “काफी खराब” हो सकती थी।
रिजिजू का दावा—वे मौके पर मौजूद थे
रिजिजू ने बाद के बयानों में कहा कि वे अध्यक्ष के कक्ष में हुई कथित घटना के दौरान स्वयं मौजूद थे।
उन्होंने ओम बिरला को एक शांत और संयमित पीठासीन अधिकारी बताया और कहा कि अध्यक्ष चाहें तो सख्त कार्रवाई कर सकते थे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता, जिनमें प्रियंका गांधी वाड्रा और के.सी. वेणुगोपाल शामिल थे, उस दौरान मौजूद थे और सांसदों का उत्साहवर्धन कर रहे थे।
विपक्ष का आरोप—अध्यक्ष पक्षपाती
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अध्यक्ष बिरला पर सरकार के पक्ष में पक्षपात करने का आरोप लगाया है।
इस सप्ताह विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ हटाने का प्रस्ताव नोटिस दिया, उन्हें “स्पष्ट रूप से पक्षपाती” बताते हुए कहा कि जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, उन्हें पद से हट जाना चाहिए।
उन्होंने हालिया घटनाक्रम पर भ्रामक बयान देने का भी आरोप लगाया।
संसदीय प्रक्रिया की अनदेखी
रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसदों ने अध्यक्ष के आदेशों की अनदेखी कर संसदीय मर्यादा का उल्लंघन किया।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने औपचारिक अनुमति के बिना बोलने पर जोर दिया, जो स्थापित प्रक्रिया के विपरीत है।
“प्रधानमंत्री को भी सदन को संबोधित करने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी पड़ती है,” रिजिजू ने कहा, और जोर दिया कि बहस संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री के जवाब के बिना पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव
2 फरवरी से संसद में लगातार व्यवधान जारी है, जिससे विधायी कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
5 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री मोदी के पारंपरिक उत्तर के बिना ही पारित हो गया, जो संसदीय इतिहास में असामान्य घटना मानी जा रही है।
लगातार नारेबाजी के बीच अध्यक्ष बिरला ने प्रस्ताव को पढ़कर पारित घोषित किया।
भाजपा का आरोप—संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश
भाजपा ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और संसदीय गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव राजनीतिक उद्देश्य से लाया गया है और यह विपक्ष द्वारा की गई प्रक्रियागत त्रुटियों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
रिजिजू ने चेतावनी दी कि इस तरह का आचरण संसद में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है।
राजनीतिक टकराव जारी
चल रहे बजट सत्र के दौरान यह विवाद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और तीव्र कर चुका है।
शिष्टाचार, अधिकार और संस्थागत गरिमा को लेकर परस्पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मुद्दा व्यापक राजनीतिक बहस और मीडिया जांच का विषय बन गया है।
समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक तनाव के बीच संसद की कार्यप्रणाली अब भी दबाव में बनी हुई है।
