16 फरवरी 1923 को ब्रिटेन के पुरातत्वविद् Howard Carter ने मिस्र के थेब्स (आज का लक्सर) में प्राचीन मिस्र के युवा राजा Tutankhamun की बंद कब्र के अंदर प्रवेश किया। यह खोज दुनिया की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में गिनी जाती है।
प्राचीन मिस्र में फराओ को भगवान जैसा माना जाता था। उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को सुरक्षित रखने के लिए ममी बनाया जाता था। फिर उन्हें बड़ी और भव्य कब्रों में दफनाया जाता था, जिनमें सोना, गहने और कई कीमती चीजें रखी जाती थीं। ऐसा माना जाता था कि ये चीजें उन्हें परलोक में काम आएंगी।
19वीं सदी तक कई कब्रें खोजी जा चुकी थीं, लेकिन ज्यादातर कब्रें पहले ही लूट ली गई थीं। कार्टर को विश्वास था कि एक कब्र अब भी छिपी हुई है—वह थी तुतनखामुन की, जो करीब 1400 ईसा पूर्व जीवित थे और कम उम्र में ही उनकी मृत्यु हो गई थी।
कार्टर को खुदाई के लिए अमीर सहयोगी Lord Carnarvon से आर्थिक मदद मिली। कई सालों तक खोज करने के बाद भी कुछ नहीं मिला। 1922 में जब खुदाई बंद करने की बात आई, तो कार्टर ने एक साल और कोशिश करने का आग्रह किया।
नवंबर 1922 में आखिरकार सफलता मिली। किंग्स की घाटी में मजदूरों को सीढ़ियां मिलीं, जो Ramesses VI की कब्र के पास दबाई गई थीं। ये सीढ़ियां एक बंद दरवाजे तक जाती थीं, जिस पर तुतनखामुन का नाम लिखा था।
जब कब्र खोली गई, तो वह लगभग 3,000 साल से सुरक्षित थी। 16 फरवरी 1923 को अंतिम कक्ष खोला गया। अंदर एक बड़ा पत्थर का ताबूत था, जिसमें तीन ताबूत एक-दूसरे के अंदर रखे थे। सबसे अंदर वाला ताबूत सोने का था, जिसमें राजा की ममी थी।
कब्र में सोने के गहने, मूर्तियां, रथ, कपड़े और कई कीमती सामान मिले। तुतनखामुन का सोने का मुखौटा सबसे प्रसिद्ध वस्तु बना।
कब्र खुलने के कुछ समय बाद लॉर्ड कार्नरवॉन की मृत्यु हो गई। इसके बाद “ममी के श्राप” की कहानी फैल गई कि जो भी कब्र खोलेगा, उसकी मौत हो जाएगी। लेकिन बाद की जांच में यह सच नहीं पाया गया।
आज भी तुतनखामुन की कब्र की खोज लोगों को हैरान और आकर्षित करती है। यह हमें प्राचीन मिस्र के जीवन और परंपराओं के बारे में बहुत कुछ बताती है।
