भारत ‘दलाल राष्ट्र’ नहीं है : पाकिस्तान मध्यस्थता पर सर्वदलीय बैठक में एस. जयशंकर का बयान

केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गयी सर्वदलीय बैठक लगभग डेढ़ घंटे चली जिसमे सभी राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है और अतिरिक्त आपूर्ति रास्ते में है.

एस. जयशंकर

मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग के वजह से गैस और तेल की समस्या बनी हुई हैं, जिसको लेकर सरकार ने मध्यस्थत पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई. इस बैठक में जब विदेश मंत्री जयशंकर से ईरान जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर सवाल किया गया जिस पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान मध्यस्थात बैठक में पाकिस्तान को तंज करते हुए दलाल राष्ट कहा, उन्होंने कहा वैश्विक भू-राजनीति में भारत किसी भी तरह से “दलाल राष्ट्र” (यानी बिचौलिया) की भूमिका नहीं निभा सकता, यह बात विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को पश्चिम एशिया संकट पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में स्पष्ट रूप से कही। यह बयान उस समय आया जब विपक्ष ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका पर सवाल उठाए।

सरकार ने इन चिंताओं का जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थ के रूप में भूमिका कोई नई बात नहीं है, बल्कि 1981 से जारी है। वाशिंगटन लंबे समय से तेहरान के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए इस्लामाबाद को एक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जयशंकर ने जोर देकर कहा कि इस तरह की मध्यस्थता में “कुछ भी नया” नहीं है।

सरकार ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए, क्योंकि इसका असर सभी पक्षों पर नकारात्मक पड़ रहा है।

यह सर्वदलीय बैठक संसद में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। साथ ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जेडीयू और सीपीआई(एम) समेत विभिन्न दलों के नेता भी मौजूद रहे।

पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश

जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान इस संकट में खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश तेज कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच “सार्थक और निर्णायक बातचीत” को सुगम बनाने के लिए तैयार है और दोनों पक्षों की सहमति मिलने पर वार्ता की मेजबानी भी कर सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान मिस्र और तुर्किये के साथ मिलकर बैकचैनल कूटनीति में सक्रिय है। इसी कड़ी में शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से बात कर बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और हालात शांत करने की अपील की।

अमेरिका के संकेत और कूटनीतिक गतिविधियां

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शरीफ के बयान को ट्रुथ सोशल पर साझा किया, जिससे कूटनीतिक हलचल और तेज हो गई। इससे पहले ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों पर प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए टाल रहा है, ताकि बातचीत का रास्ता खुला रह सके।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेश पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व, जिसमें आसिम मुनीर शामिल हैं, ने अमेरिका से संपर्क किया, जबकि अमेरिकी प्रस्ताव पाकिस्तानी चैनलों के जरिए ईरान तक पहुंचाए गए।

इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराकची से बातचीत की। ईरान ने प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की है और संकेत दिया है कि संभावित वार्ता पाकिस्तान या तुर्की में हो सकती है, हालांकि अभी कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ है।

ईरान का सख्त रुख

बैकचैनल बातचीत की खबरों के बावजूद, ईरान ने सार्वजनिक रूप से किसी भी वार्ता से इनकार किया है और अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी कदमों को “कूटनीति के साथ विश्वासघात” बताया और कहा कि उनकी प्राथमिकता देश की संप्रभुता की रक्षा करना है।

इज़राइल, जिसका नेतृत्व बेंजामिन नेतन्याहू कर रहे हैं, को भी इस प्रस्ताव की जानकारी दी गई है और वह ईरान की प्रतिक्रिया को लेकर संशय में है।

सरकार बनाम विपक्ष

सरकार ने इस मुद्दे पर चुप रहने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और उचित प्रतिक्रिया दे रही है। साथ ही, उसने कूटनीतिक प्रयासों का हवाला भी दिया, जिसमें ईरानी दूतावास में शोक प्रकट करना शामिल है।

सरकार का कहना है कि उसकी प्राथमिकता खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना है। हालांकि, विपक्ष ने सरकार के जवाब को “असंतोषजनक” बताते हुए संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है। कांग्रेस नेता तारीक अनवर ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि भारत “मूक दर्शक” बना हुआ है।

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