ईरान ने लागू की ‘डिसेंट्रलाइज्ड मोज़ाइक डिफेंस’: IRGC को 31 स्वायत्त कमांड में बांटकर बदली सैन्य रणनीति

ईरान के विदेश मंत्री अब्दुल्ला अरघची ने 1 मार्च को कहा कि राजधानी पर हमले “इस युद्ध की दिशा तय नहीं करेंगे”। उन्होंने बताया कि विकेन्द्रीकृत प्रणाली के तहत ईरान निर्णय लेने में स्वतंत्र है

ईरान ने लागू की ‘डिसेंट्रलाइज्ड मोज़ाइक डिफेंस’

ईरान ने लागू की ‘डिसेंट्रलाइज्ड मोज़ाइक डिफेंस’

ईरान ने अपने लंबे समय से तैयार किए गए ‘डिसेंट्रलाइज्ड मोज़ाइक डिफेंस’ (Decentralized Mosaic Defense) सिद्धांत को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को 31 अर्ध‑स्वायत्त (semi-autonomous) संचालन कमांड्स में विभाजित कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरानी ठिकानों और कमांड नोड्स पर हमले बढ़ रहे हैं।

नए ढांचे के तहत संगठन

  • एक कमांड Tehran के साथ केंद्रित है।

  • शेष 30 कमांड ईरान की विभिन्न प्रांतों से संबंधित हैं।

  • इस बदलाव से देश की सैन्य संरचना केंद्रीकृत कमांड से विकेन्द्रीकृत नेटवर्क में बदल गई है, जो नेतृत्व पर सीधे हमले या इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान भी काम करता रहेगा।

क्यों अब मोज़ाइक डिफेंस सक्रिय की गई

हालिया अमेरिकी और इज़राइली हवाई तथा साइबर हमलों ने कथित तौर पर IRGC के कमांड नोड्स, संचार केंद्र और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों का मकसद शीर्ष‑स्तरीय नियंत्रण को बाधित करना था।

इस पर प्रतिक्रिया में तेहरान ने अपनी पूर्व विकसित मोज़ाइक डिफेंस रणनीति को सक्रिय किया, जो ठीक ऐसे परिदृश्य के लिए बनाई गई थी।

ईरान के विदेश मंत्री अब्दुल्ला अरघची ने 1 मार्च को कहा कि राजधानी पर हमले “इस युद्ध की दिशा तय नहीं करेंगे”। उन्होंने बताया कि विकेन्द्रीकृत प्रणाली के तहत ईरान निर्णय लेने में स्वतंत्र है कि “कब और कैसे” संघर्ष समाप्त होगा। इसका मतलब यह है कि अगर केंद्रीय नेतृत्व बाधित भी हो गया, तो लड़ाई जारी रहेगी।

डिसेंट्रलाइज्ड मोज़ाइक डिफेंस कैसे काम करता है

  • मोज़ाइक डिफेंस सिद्धांत (फ़ारसी में Defa-e Mozaik) ईरान को स्वतंत्र “पज़ल पीस” में विभाजित करता है।

  • प्रत्येक प्रांतीय IRGC कमांड एक स्वतंत्र सैन्य नोड के रूप में कार्य करता है और निम्न कार्य कर सकता है:

    • बैलिस्टिक या क्रूज़ मिसाइलें लॉन्च करना

    • ड्रोन स्वार्म तैनात करना

    • गुरिल्ला छापामार अभियान चलाना

    • नौसैनिक स्वार्म हमले करना

    • स्थानीय प्रतिशोध करना

  • कमांडरों को अब तेहरान से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

ईरान की भौगोलिक स्थिति भी रणनीति में अहम है।

  • पर्वत क्षेत्र छापामार युद्ध के लिए उपयुक्त हैं।

  • रेगिस्तान फैलाव और छिपाव की सुविधा देता है।

  • फारस की खाड़ी के तटीय प्रांत असममित (asymmetric) नौसैनिक अभियान के लिए तैयारी स्थल प्रदान करते हैं।

इस रणनीति में “गहराई में रक्षा” (defense in depth) प्रणाली बनती है: एक कमांड को नष्ट करने से पूरा नेटवर्क नहीं टूटता, बल्कि स्वतंत्र रूप से संचालन जारी रहता है।

स्ट्रेट ऑफ होरमज़: तात्कालिक संकट क्षेत्र

  • फारस की खाड़ी में Strait of Hormuz महत्वपूर्ण है, जिसके माध्यम से विश्व के लगभग 20% तेल का परिवहन होता है।

  • IRGC ने लंबे समय से स्वार्म (swarm) युद्ध तकनीक में प्रशिक्षण लिया है — तेज़ हमले वाले नौकाओं के बेड़े बड़े युद्धपोतों को चुनौती देने के लिए।

  • फरवरी में “Smart Control” अभ्यास में उन्होंने समन्वित लेकिन विकेन्द्रीकृत नौसैनिक maneuvers का अभ्यास किया:

    • स्पीडबोट्स के साथ स्वार्मिंग अभ्यास

    • इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सिमुलेशन

    • राडार जामिंग परिदृश्य

    • सैचुरेशन अटैक फॉर्मेशन

  • अब प्रांतीय कमांडर बिना केंद्रीय अनुमति के किसी भी तटीय कार्रवाई को शुरू कर सकते हैं।

इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर असर पड़ सकता है। होरमज़ में थोड़ी भी रुकावट तेल की कीमत बढ़ा सकती है और जहाज़ी मार्ग बदलने पर मजबूर कर सकती है।

अमेरिका और इज़राइल के लिए रणनीतिक बदलाव

  • मोज़ाइक डिफेंस ने पारंपरिक हवाई शक्ति की रणनीति को चुनौती दी है।

  • अब एक केंद्रीय कमांड को निशाना बनाना उतना प्रभावी नहीं होगा।

  • ईरान कई स्वायत्त नोड्स प्रस्तुत करता है, इसलिए तेहरान के मुख्यालय को निष्क्रिय करने से प्रांतीय मिसाइल या नौसैनिक संचालन रुकने की संभावना कम है।

  • रणनीतिक रूप से इसे “हाइड्रा इफ़ेक्ट” कहा जा सकता है: एक कमांड को हटाने से अन्य कमांड प्रभावित नहीं होती।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संघर्ष लंबा हो सकता है, संचालन की लागत बढ़ सकती है और लड़ाई का क्षेत्र व्यापक हो सकता है। क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ सकता है क्योंकि प्रांतीय कमांडर तेज़ निर्णय ले सकते हैं।

क्षेत्रीय चिंता और बढ़ते जोखिम

  • GCC (Gulf Cooperation Council) देशों की निगरानी बढ़ गई है।

  • IRGC की स्वतंत्रता बढ़ने से प्रतिशोध कई मोर्चों से हो सकता है।

  • विकेन्द्रीकरण लचीलापन बढ़ाता है लेकिन केंद्रीकृत नियंत्रण घटा सकता है।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली विरोधियों के लिए निर्णायक जीत को कठिन बनाती है और मजबूत निरोधक (deterrent) बनाती है।

असममित युद्ध की जड़

  • मोज़ाइक डिफेंस का विचार वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान के संघर्षों से लिया गया है, जहाँ बिखरे हुए विद्रोही नेटवर्क ने तकनीकी रूप से मजबूत सेनाओं को चुनौती दी।

  • ईरान की पारंपरिक सेना अमेरिका और इज़राइल के हवाई बलों से पीछे हो सकती है, लेकिन असममित रणनीति — मिसाइल, ड्रोन, साइबर और नौसैनिक स्वार्म — स्थिति को संतुलित करती है।

  • IRGC में लगभग 1,90,000 कर्मी हैं, जो ग्राउंड, नौसैनिक और एयरोस्पेस ब्रांच में फैले हैं।

आगे क्या हो सकता है?

  • डिसेंट्रलाइज्ड मोज़ाइक डिफेंस लागू होना ईरान की सैन्य संरचना में सबसे बड़ा बदलाव है।

  • यह प्रणाली कितनी प्रभावी होगी या संघर्ष को तेज़ करेगी, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।

महत्वपूर्ण संकेतक:

  • स्ट्रेट ऑफ होरमज़ में IRGC की नौसैनिक गतिविधियों में वृद्धि

  • प्रांतीय इकाइयों से स्वतंत्र मिसाइल लॉन्च

  • ड्रोन स्वार्म संचालन का विस्तार

  • साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की तीव्रता

ईरान ने संकेत दिया है कि वह लंबे, विकेन्द्रीकृत संघर्ष के लिए तैयार है, बजाय किसी संक्षिप्त और केंद्रीकृत युद्ध के।

वैश्विक तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और महाशक्तियों के बीच सामरिक संतुलन इस समय होरमज़ पर टिका है। ईरान की नई स्वायत्त सैन्य “पज़ल पीस” रणनीति अब इस चरण में युद्धभूमि को बदलने की क्षमता रखती है।

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