28 फरवरी को इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों पर हवाई हमले किए। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वॉर रूम में बैठकर एयरस्ट्राइक की निगरानी कर रहे थे।
इजराइल ने इस सैन्य अभियान का कोडनेम “लायन रोअर” (शेर की दहाड़) रखा है, जबकि अमेरिका ने इसे “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अपने हमलों को “खत्म-ए-तूफान” नाम दिया।
खामेनेई को लेकर विरोधाभासी दावे
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इजराइली अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत हो गई है और उनका शव हमले के मलबे में मिला है।
हालांकि ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि खामेनेई जिंदा हैं और सुरक्षित स्थान पर हैं।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने पुष्टि की है कि हमलों में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू की मौत हुई है।
इससे पहले इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी कहा था कि खामेनेई के मारे जाने के संकेत हैं, लेकिन उन्होंने कोई सबूत पेश नहीं किया।
कितने लोग मारे गए?
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के हमलों में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
एक हमले में ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 घायल हो गईं।
रॉयटर्स के मुताबिक, हमलों में ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादेह और रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपोर की भी मौत हुई है।
खामेनेई कई दिनों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए
86 वर्षीय अली खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता और कमांडर-इन-चीफ हैं। देश के सभी बड़े राजनीतिक और धार्मिक फैसले वही लेते हैं। ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), सीधे उन्हें रिपोर्ट करती है।
1989 में ईरान के संस्थापक Ruhollah Khomeini की मृत्यु के बाद खामेनेई सुप्रीम लीडर बने थे। 1979 की इस्लामी क्रांति में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
शनिवार को हुए हमलों में से एक हमला उनके कार्यालय के पास हुआ था। लेकिन उस समय वे कहां थे, यह साफ नहीं है। वे कई दिनों से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।
ईरान का जवाबी हमला
इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमलों के जवाब में ईरान ने इजराइल पर लगभग 400 मिसाइलें दागीं। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया।
अमेरिका-इजराइल का संयुक्त सैन्य अभियान
इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के 10 शहरों पर एयरस्ट्राइक की। हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए की गई है।
यह हमला उस समय हुआ जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी।
बैलिस्टिक मिसाइल बना सबसे बड़ा विवाद
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में सबसे बड़ा विवाद बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर है। ईरान इस मुद्दे पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी “रेड लाइन” मानता है।
ईरान का कहना है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। उसका दावा है कि पहले हुए हमलों के दौरान उसकी मिसाइलों ने देश की रक्षा की थी।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी। मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय समूहों पर कोई चर्चा नहीं होगी।
