ईरान ने दिया अमेरिका को बड़ा जख़्म, 31 दिन में 2400 पैट्रियट स्वाहा, THAAD का स्टॉक हुआ खत्म, खुश हुआ चीन

पिछले 32 दिनों से ईरान इजराइल युद्ध लगातार चल रहा है, जिसमे केवल ईरान और इजराइल को ही नहीं बल्कि अमेरिका का भी अच्छा खासा नुक़सान हुआ है जिसके कारण अपने आप को सुपरपावर कहने वाला अमेरिका भी प्रभावित हुआ है

ईरान ने दिया अमेरिका को बड़ा जख़्म

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के वजह से पूरा विश्व इस समय परेशानी झेल रहा है चारों तरफ़ गैस और पेट्रोल की समस्या चल रही है इसी बीच ईरान ने ऐसा क्या किया है जिसके कारण अमेरिका जल्द से जल्द इस युद्ध से अपने पैर पीछे खींचना चाह रहा है, आखिर इस युद्ध से अब तक अमेरिका को कितना नुकसान हो चूका है और इससे चीन का क्या फायदा है, आईये जानते है।

ईरान-अमेरिका युद्ध: बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिकी सैन्य शक्ति को झटका

पिछले 32 दिनों से ईरान इजराइल युद्ध लगातार चल रहा है, जिसमे केवल ईरान और इजराइल को ही नहीं बल्कि अमेरिका का भी अच्छा खासा नुक़सान हुआ है जिसके कारण अपने आप को सुपरपावर कहने वाला अमेरिका भी प्रभावित हुआ है अब तक की बात करे तो अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हो रही जंग में अपने डिफेंस सिस्टम के तहत 2400 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें दाग दीं है, ये वही मिसाइलें हैं जो दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर देती हैं। खास बात यह है कि अमेरिका सालाना सिर्फ लगभग 650 पैट्रियट इंटरसेप्टर ही बना पाता है, यानी 31 दिनों में जितना स्टॉक खर्च हुआ, उसे दोबारा तैयार करने में करीब साढ़े तीन साल लग सकते हैं।

इतना ही नहीं, अमेरिका ने अपनी THAAD मिसाइलों के वैश्विक स्टॉक का करीब 40 प्रतिशत भी इस्तेमाल कर लिया है। THAAD सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए बेहद उन्नत और अहम माना जाता है। चूंकि अमेरिका हर साल 100 से भी कम THAAD इंटरसेप्टर बनाता है, इसलिए मौजूदा खर्च के बाद पूरे स्टॉक को फिर से भरने में लगभग 4 से 5 साल लग सकते हैं।

बर्बाद हो रहा अमेरिका मुस्कुरा रहा चीन

दरअसल हर पैट्रियट और THAAD इंटरसेप्टर में नीओडिमियम और समैरियम-कोबाल्ट जैसे विशेष मैग्नेट इस्तेमाल होते हैं, जो रेयर अर्थ तत्वों से बनाए जाते हैं। ज्ञात है कि वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। ऐसे में स्थिति यह बनती है कि अमेरिका के पास रक्षा उत्पादन के लिए रेयर अर्थ का सीमित भंडार ही उपलब्ध है। अगर किसी कारणवश चीन आपूर्ति बाधित करता है, तो अमेरिका को नई मिसाइलों के निर्माण पर गंभीर असर पड़ सकता है।

कितना नुक़सान हुआ अमेरिका को इस युद्ध से

सब मिलाकर देखा जाए तो पिछले 31 दिनों के युद्ध में ही अमेरिका ने अपनी मिसाइल डिफेंस का बड़ा हिस्सा गंवा दिया. अमेरिका अब उसे दोबारा तैयार करने में कम से कम साढ़े तीन से पांच साल लगेंगे. इस दौरान वो दुश्मनों के हमले के सामने कमजोर हो गया है. चीन पर निर्भरता ने स्थिति और खतरनाक बना दी है. ये सिर्फ स्टॉक की कमी नहीं, बल्कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा झटका है. शायद यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करना चाहते हैं.

 

 

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