एम के स्टालिन इन दिनों अपने विवादित बयान से लगातार चर्चा में बने हुए हैं, उन्होंने, ने दो बड़े अंतरराष्ट्रीय मामलों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। पहला मामला है अमेरिका द्वारा भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए केवल 30 दिन की छूट देना, और दूसरा है ईरानी युद्धपोत IRIS Dena का डूबना, जिसमें लगभग 87 नाविकों की मौत हो गई।
स्टालिन का कहना है कि पीएम मोदी की सरकार भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और विदेश नीति में कमजोर दिखाई दे रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर लिखा कि अगर अमेरिका भारत को केवल 30 दिन के लिए तेल खरीदने की अनुमति देता है, तो यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा, “भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी और देश की अनुमति क्यों लेनी चाहिए?”
स्टालिन ने IRIS Dena जहाज के डूबने पर भी चिंता जताई। यह जहाज विशाखापट्नम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लेने आया था, जो भारत का अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास था। स्टालिन ने कहा कि अगर भारत के पानी में कोई जहाज इस तरह डूबता है, तो भारत चुप नहीं रह सकता। उन्होंने जोर दिया कि भारत की प्रतिष्ठा, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा जरूरी है।
अमेरिका की 30 दिन की तेल छूट
यह छूट अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने दी। इसका मकसद था कि भारत रूसी तेल खरीदता रहे और वैश्विक तेल आपूर्ति संतुलित रहे। यह कदम ईरान के प्रभाव को कम करने के लिए भी लिया गया, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी।
भारत अपना लगभग 40% तेल मध्य पूर्व से आयात करता है, जो मुख्य रूप से Strait of Hormuz से होकर आता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए विदेशी अनुमति पर निर्भरता दिखती है।
भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया
स्टालिन की आलोचना का समर्थन कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने किया।
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सांसद Manish Tewari ने अमेरिका के कदम को “नव-साम्राज्यवादी अहंकार” बताया और पूछा कि क्या भारत अब ऐसा देश बन गया है जिसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए किसी और की अनुमति लेनी पड़े।
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वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने इसे “अमेरिकी दबाव” कहा और सरकार से राष्ट्रीय हितों की रक्षा की अपील की।
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कांग्रेस नेता Randeep Singh Surjewala ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने भारत की संप्रभुता से समझौता किया।
