नारी शक्ति: भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका, सशस्त्र बलों में भी बढ़ी भागीदारी

नारी शक्ति भारत में लगातार तेजी से आगे बढ़ रही है, ऐसे में महिलाएं अब खाने बनाने के अलावा बाकी क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही हैं।

भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

नारी शक्ति को भारत में सलाम है, भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यह बदलाव सेना की कार्यसंस्कृति में एक बड़ा परिवर्तन दिखाता है। पहले महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से मेडिकल और नर्सिंग सेवाओं तक सीमित थी, लेकिन अब वे फ्रंटलाइन ऑपरेशन, कमांड पदों और रणनीतिक जिम्मेदारियों में भी काम कर रही हैं। यह बदलाव सरकार की नई नीतियों, अदालत के फैसलों और सेना की पहल के कारण संभव हुआ है, जिनका उद्देश्य महिलाओं को समान अवसर देना है।

भारत में महिलाओं को सेना में शामिल करने की शुरुआत 1958 में Army Medical Corps में महिला डॉक्टरों की भर्ती से हुई थी। इसके बाद 1992 में महिलाओं को अधिकारी के रूप में सेना में प्रवेश का मौका मिला। आज महिलाएं सेना की कई शाखाओं में स्थायी कमीशन प्राप्त कर चुकी हैं। वे ऊंचाई वाले इलाकों में यूनिट की कमान संभाल रही हैं, युद्धपोतों पर सेवा दे रही हैं और लड़ाकू विमान व हेलीकॉप्टर भी उड़ा रही हैं।

तीनों सेनाओं में महिलाओं की उपलब्धियां

Indian Army में महिलाओं को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। Sadhna Saxena Nair सेना में Director General of Medical Services बनने वाली पहली महिला बनीं। वहीं Ponung Doming दुनिया की सबसे ऊंची Border Task Force की कमान संभाल रही हैं। यह दिखाता है कि महिलाएं बड़े सैन्य नेतृत्व की जिम्मेदारी भी निभा सकती हैं।

Indian Air Force में भी महिलाओं ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। Bhawana Kanth, Avani Chaturvedi और Shivangi Singh फाइटर पायलट बनकर इतिहास रच चुकी हैं। वे लड़ाकू मिशनों में हिस्सा ले चुकी हैं और Dassault Rafale जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी उड़ा रही हैं। इसके अलावा Anjali Singh विदेश में तैनात होने वाली पहली महिला सैन्य राजनयिक बनीं।

Indian Navy में भी महिलाओं ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। Annu Prakash ने समुद्री सुरक्षा अभियानों में अहम भूमिका निभाई। Hansja Sharma सेना की पहली महिला Rudra हेलीकॉप्टर पायलट बनीं। वहीं Aastha Poonia नौसेना के फाइटर एविएशन में शामिल होने वाली महिला अधिकारियों में से एक हैं।

इसके अलावा Dilna K और Roopa A ने INSV Tarini पर सवार होकर 25,600 नॉटिकल मील की समुद्री यात्रा पूरी की। यह उनकी हिम्मत और नेतृत्व का बड़ा उदाहरण है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान

भारतीय महिला सैनिक दुनिया भर में भी अपनी पहचान बना रही हैं। Swathi Shanthakumar और Radhika Sen को संघर्षग्रस्त इलाकों में काम करने और शांति मिशनों में योगदान के लिए United Nations से सम्मान मिला है।

2025 तक भारत की 154 से ज्यादा महिला सैनिक छह संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में तैनात हैं। सैन्य पर्यवेक्षक और स्टाफ अधिकारियों के रूप में 22 प्रतिशत महिलाएं काम कर रही हैं, जो वैश्विक स्तर के लक्ष्य से भी ज्यादा है।

बढ़ती संख्या और भविष्य

भारतीय सेना में महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 2014 में लगभग 3,000 महिला अधिकारी थीं, जो अब 11,000 से ज्यादा हो चुकी हैं। अब महिलाओं को National Defence Academy के माध्यम से भी सेना में आने का मौका मिल रहा है।

हाल के बैचों में मई 2025 में 17 और नवंबर 2025 में 15 महिला कैडेट पास आउट हुईं। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से सबसे ज्यादा महिला कैडेट आ रही हैं। सेना ने महिला कैडेटों की भर्ती भी लगभग 80 प्रतिशत तक बढ़ा दी है।

कुल मिलाकर, भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। वे न केवल देश की रक्षा कर रही हैं बल्कि सेना के भविष्य को भी नई दिशा दे रही हैं। यह सच में नारी शक्ति” का मजबूत उदाहरण है।

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