6 महीने के विश्राम के बाद अप्रैल में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम यात्रा की शुरुआत होनी है।ऐसे में सरकार ने यात्रा शुरू होने से पहले बड़ा निर्णय लेते हुए इन प्रतिष्ठित मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित कर दिया है। सरकार के मुताबिक इस प्रस्ताव का उद्देश्य सनातन धर्म Sanatana का पालन न करने वाले लोगों के Kedarnath और Badrinath में प्रवेश को सीमित करने की प्रथा को औपचारिक रूप देना है।
दरअसल बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें इन दोनों मंदिरों में गैर–हिंदुओं के प्रवेश को सीमित करने की मांग की गई है। मंदिर समिति की बैठक में समिति ने 2026–27 के तीर्थ यात्रा सीजन के लिए 121 करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित बजट को भी मंजूरी दी।
फैसले को सही ठहराते हुए BKTC के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन लोगों के मंदिरों में प्रवेश को सीमित करने की परंपरा को औपचारिक रूप देना है, जो सनातन धर्म का पालन नहीं करते।
उन्होंने कहा, “यह फैसला किसी के खिलाफ नहीं है। देवभूमि और यहां के पवित्र मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं।”
सिख, जैनऔर बौद्ध मत मानने वालों पर लागू नहीं होगा फैसला
बद्री–केदार मंदिर समिति के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत “हिंदू” शब्द की व्याख्या में Sikhism, Jainism और Buddhism के अनुयायी भी शामिल माने जाते हैं, इसलिए उन पर किसी प्रकार की रोक नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि आदेश का पालन करवाने के लिए श्रद्धालुओं के पंजीकरण विवरण की जांच की जाएगी, जिसमें आधार कार्ड की जानकारी भी शामिल होगी।
पहले से ही है ग़ैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की प्रथा
हालांकि बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में ग़ैर हिंदुओं के प्रवेश पर पहले से ही रोक है, लेकिन अभी तक इसे एक प्रथा के रूप में माना जाता रहा है, वहीं अब इस प्रस्ताव के पास होने के बाद इस प्रथा को कानूनी रूप मिल जाएगा।
मंदिर समिति द्वारा बताया गया कि प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले पुजारियों और विभिन्न धार्मिक संगठनों से विस्तृत परामर्श किया गया था।
इससे पहले मंदिर समिति की तरफ़ से कहा गया कि ये तीर्थ स्थल कोई पर्यटन स्थल नहीं हैं, बल्कि सनातन परंपरा के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं। इसलिए यहां गैर–हिंदुओं के प्रवेश का मुद्दा धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। उनके इस प्रस्ताव का दोनों मंदिरों के पुजारियों द्वारा भी समर्थन किया गया था।
इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण कदमों को भी मंजूरी दी गई है। श्रद्धालु मंदिर परिसर से एक तय दूरी के भीतर मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे, इसके अलावा ऑनलाइन पूजा की सुविधा भी शुरू की गई है।
