पाकिस्तान के लाहौर शहर से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां कुख्यात आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक सदस्यों में शामिल अमीर हमजा पर जानलेवा हमला किया गया है। यह घटना उस समय हुई जब वह एक न्यूज चैनल के दफ्तर के बाहर मौजूद था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हमले में अमीर हमजा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।
इस घटना ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क के भीतर चल रही हलचलों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना कैसे हुई: अचानक फायरिंग से मचा हड़कंप
यह हमला लाहौर के एक व्यस्त इलाके में स्थित एक मीडिया हाउस के बाहर हुआ। जानकारी के मुताबिक, हमलावर पहले से घात लगाए बैठे थे और जैसे ही अमीर हमजा वहां पहुंचा, उन्होंने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि गोलीबारी की आवाज सुनते ही लोग इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से घिर गया।
हालांकि, हमलावर मौके से फरार हो गए और अब तक उनकी पहचान नहीं हो पाई है। पाकिस्तान की पुलिस और खुफिया एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं।
कौन है अमीर हमजा? आतंकी नेटवर्क का अहम चेहरा
अमीर हमजा लश्कर-ए-तैयबा के शुरुआती और प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। उसने हाफिज सईद के साथ मिलकर इस संगठन की नींव रखी थी और दुनिया भर में आतंकी हमले कराये, उसकी भूमिका केवल एक सदस्य तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह संगठन के वैचारिक और प्रचार तंत्र का मुख्य चेहरा था। वह युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने, फंडिंग जुटाने और आतंकी गतिविधियों के विस्तार में सक्रिय रूप से शामिल रहा, बताया जाता है कि वह अफगान मुजाहिदीन से भी जुड़ा रहा और अपने भड़काऊ भाषणों व लेखन के लिए कुख्यात था, भारत में हुए बहुत से आतंकी हमले में उसका हाथ रहा है।
कट्टरपंथी विचारधारा और प्रचार में भूमिका
अमीर हमजा ने आतंकी विचारधारा को फैलाने के लिए कई माध्यमों का इस्तेमाल किया। वह लश्कर की पत्रिका ‘मजल्लह अल-दावा’ का संपादक रह चुका है।
साल 2002 में उसने “काफिला दावत और शहादत” नाम की किताब भी लिखी, जिसमें चरमपंथी विचारों को बढ़ावा दिया गया। इस किताब और उसके भाषणों के जरिए उसने कई युवाओं को प्रभावित किया, उसकी छवि एक ऐसे व्यक्ति की रही है, जो पर्दे के पीछे रहकर आतंकी नेटवर्क को मजबूत करता था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकी
अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने भी लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी संगठन घोषित किया है और अमीर हमजा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकियों की सूची में शामिल किया हुआ है. साल 2018 में पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े संगठनों पर कार्रवाई के बाद उसने खुद को अलग दिखाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में उसने ‘जैश-ए-मनकाफा’ नाम से एक नया संगठन बनाया, जो कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर समेत कई इलाकों में सक्रिय रहा. रिपोर्ट्स कहती हैं कि के मुताबिक, अमीर हमजा का नाम भारत में कई आतंकी हमलों और साजिशों से जुड़ा रहा है और वह लंबे समय तक आतंक के नेटवर्क का अहम हिस्सा बना रहा.
भारत में आतंकी घटनाओं से कनेक्शन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमीर हमजा का नाम भारत में कई आतंकी साजिशों और हमलों से जोड़ा गया है। हालांकि, इन मामलों में सीधे तौर पर उसकी भूमिका कितनी थी, यह जांच का विषय रहा है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उसे लंबे समय से एक महत्वपूर्ण आतंकी कड़ी मानती रही हैं।
उसकी गतिविधियां खासकर जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क से जुड़ी बताई जाती हैं।
2018 में पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने के बाद जब लश्कर से जुड़े संगठनों पर कार्रवाई हुई, तो अमीर हमजा ने खुद को अलग दिखाने की कोशिश की, इसके बाद उसने ‘जैश-ए-मनकाफा’ नाम से एक नया संगठन बनाया, जो कथित तौर पर कई इलाकों में सक्रिय रहा। यह कदम इस बात का संकेत था कि वह आतंकी गतिविधियों को नए रूप में जारी रखना चाहता था।
