पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘दीदी’ बनाम ‘दादा‘ की जंग अब अपने निर्णायक दौर में पहुँच चुकी है। 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने सबसे बड़े रणनीतिकार, गृह मंत्री अमित शाह को चुनावी मैदान में उतार दिया है। दार्जिलिंग की वादियों और कुर्सियांग की पहाड़ियों के बीच अमित शाह ने न केवल ममता सरकार पर कड़ा प्रहार किया, बल्कि टीएमसी के कार्यकर्ताओं को ऐसी चेतावनी दी जिसने बंगाल की चुनावी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। शाह का यह दौरा केवल एक चुनावी जनसभा नहीं थी, बल्कि उत्तर बंगाल के गोरखाओं के साथ दशकों पुराने रिश्तों को फिर से परिभाषित करने और राज्य की कानून-व्यवस्था पर सीधा सवाल उठाने का एक बड़ा मंच था।
‘उल्टा करके सीधा कर देंगे’: टीएमसी के गुंडों को खुली चेतावनी
कुर्सियांग की जनसभा में अमित शाह का लहज़ा बेहद आक्रामक रहा। उन्होंने टीएमसी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय बाहुबलियों को संबोधित करते हुए कहा, “टीएमसी के सारे गुंडे कान खोलकर सुन लें, 5 तारीख (चुनावी नतीजों के बाद) के बाद अगर किसी भी नागरिक को परेशान किया, तो उन्हें उल्टा करके सीधा करने का काम भाजपा करेगी।” शाह ने स्पष्ट किया कि 23 अप्रैल को पहाड़ के लोग अपनी मर्ज़ी से वोट देंगे और अगर किसी ने उन्हें रोकने या डराने की कोशिश की, तो 5 तारीख के बाद उनका ठिकाना जेल की सलाखें होंगी। यह बयान भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह मतदाताओं को यह भरोसा दिलाना चाहती है कि वे बिना किसी डर के मतदान केंद्र तक पहुँचें।
संदेशखाली का ज़िक्र और महिलाओं की सुरक्षा का वादा
शाह ने ममता बनर्जी के शासन पर निशाना साधते हुए ‘संदेशखाली’ की घटनाओं को बंगाल के माथे पर कलंक बताया। उन्होंने कहा कि जिस बंगाल में माताओं-बहनों की पूजा होती थी, वहां आज उन पर अत्याचार हो रहे हैं। शाह ने वादा किया कि भाजपा की सरकार बनते ही हर बलात्कारी को चुन-चुनकर जेल भेजा जाएगा। उन्होंने एक लोक-लुभावन घोषणा करते हुए कहा कि भाजपा सत्ता में आते ही राज्य की हर माता और बहन के बैंक खाते में हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे भेजेगी। इसके अलावा, बेरोजगार युवाओं के लिए भी 3,000 रुपये प्रति माह के भत्ते का वादा किया गया है, जो सीधे तौर पर मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों को लुभाने की कोशिश है।
गोरखा समस्या का ‘स्थायी समाधान’ और बजट का गणित
उत्तर बंगाल की राजनीति में ‘गोरखा’ और ‘दार्जिलिंग’ की पहचान सबसे अहम है। अमित शाह ने आरोप लगाया कि ममता सरकार ने गोरखाओं के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया है। उन्होंने बजट के आंकड़ों का हवाला देते हुए एक विवादित तुलना की। शाह ने कहा, “जनजातीय विकास और उत्तर बंगाल के लिए ममता का बजट मात्र 2,000 करोड़ रुपये है, जबकि मदरसों और मुस्लिमों के लिए यह 5,700 करोड़ से अधिक है।” उन्होंने वादा किया कि भाजपा की सरकार बनने के 6 महीने के भीतर दशकों पुरानी गोरखा समस्या का समाधान ‘गोरखाओं के मनमुताबिक’ किया जाएगा। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने गृह मंत्री के तौर पर तीन बैठकें बुलाई थीं, लेकिन ममता का कोई प्रतिनिधि नहीं आया। अब भाजपा ने एक ‘इंटरलोक्यूटर’ नियुक्त किया है जो सीधे गोरखा लोगों से संवाद कर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
चाय बागान श्रमिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव
दार्जिलिंग की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘चाय बागान’ है। अमित शाह ने बागान श्रमिकों के लिए बड़े एलान किए। उन्होंने कहा कि भाजपा श्रमिकों को उनकी ज़मीन का मालिक बनाएगी और उन्हें ‘पट्टा’ (घर का अधिकार) दिया जाएगा। साथ ही, अगले दो सालों में श्रमिकों की दैनिक मजदूरी को 500 रुपये से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। विकास के मोर्चे पर शाह ने बागडोगरा एयरपोर्ट के पुनर्विकास का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि 3,000 करोड़ की लागत से बन रहा यह नया एयरपोर्ट दिसंबर 2027 तक भारत के सबसे आधुनिक और बड़े एयरपोर्ट्स में से एक होगा, जिससे उत्तर बंगाल में पर्यटन और व्यापार को नई रफ़्तार मिलेगी।
क्या ‘पहाड़’ पर खिलेगा कमल?
अमित शाह के इस दौरे ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा इस बार उत्तर बंगाल को अपना सबसे मजबूत किला मानकर चल रही है। जहाँ ममता बनर्जी अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं और ‘बंगाली गौरव’ के दम पर चुनाव लड़ रही हैं, वहीं अमित शाह ने सुरक्षा, गोरखा अस्मिता और ‘विकास के बजट’ को मुद्दा बनाकर उन्हें घेरने की कोशिश की है। 23 अप्रैल को कुर्सियांग और दार्जिलिंग की जनता यह तय करेगी कि अमित शाह की चेतावनियां और वादे उनके दिलों तक कितनी गहराई से उतरे हैं। बंगाल की सत्ता का रास्ता इस बार कोलकाता की गलियों से नहीं, बल्कि पहाड़ियों के इन्हीं संकरे रास्तों से होकर गुज़र सकता है।
