बंगाल चुनाव: आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ का घेराव, पानीहाटी में भारी तनाव और EVM पर विवाद

पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण के मतदान के दौरान राजनीति और भावनाओं का एक ऐसा संगम देखने को मिला जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है

आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ का घेराव

पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण के मतदान के दौरान राजनीति और भावनाओं का एक ऐसा संगम देखने को मिला जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र बुधवार को उस समय एक बड़े सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया, जब आरजी कर (RG Kar) अस्पताल की मृत पीड़िता की मां और भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ को भारी विरोध और घेराव का सामना करना पड़ा। एक तरफ न्याय की मांग और दूसरी तरफ चुनावी रसूख की जंग के बीच पानीहाटी में जो कुछ हुआ, वह केवल एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि बंगाल के लोकतांत्रिक मिजाज की एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

पानीहाटी में घेराव: जब ‘न्याय की आवाज’ को नारों से घेर लिया गया

घटना की शुरुआत आगरपाड़ा के न्यू आदर्श नगर इलाके में हुई, जहाँ बूथ संख्या 165 के पास रत्ना देबनाथ के काफिले को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहन को चारों तरफ से घेर लिया और “गो बैक”, “जय बांग्ला” और भाजपा के आरोपों के अनुसार “चोर-चोर” के नारे लगाए। रत्ना देबनाथ ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने उन्हें डराने-धमकाने के लिए उनके काफिले को आगे बढ़ने से रोका। यह दृश्य किसी फ़िल्मी ड्रामे से कम नहीं था, जहाँ एक मां, जो अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही है, उसे चुनावी मैदान में शारीरिक और मानसिक विरोध का सामना करना पड़ा।

सुरक्षा बलों का दखल: लाठीचार्ज और तनावपूर्ण शांति

जैसे ही घेराव की स्थिति गंभीर हुई और दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए, इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाते देख केंद्रीय बलों (Central Forces) ने हस्तक्षेप किया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान सुरक्षा बलों को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। खबरों के अनुसार, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) भी करना पड़ा। रत्ना देबनाथ ने इस घटना को “राजनीतिक डराने-धमकाने” की कोशिश बताया और मांग की कि स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए दोषियों की गिरफ्तारी की जाए।

‘रीढ़ बिकाऊ नहीं है’: एक मां की भावुक और साहसी अपील

रत्ना देबनाथ के पहनावे और उनके शब्दों ने इस चुनाव को एक गहरा भावनात्मक मोड़ दे दिया है। मतदान के दिन उन्होंने एक सफेद साड़ी पहनी थी जिस पर लिखा था— “मेरुदंड बिक्री नेई” (Merudanda Bikri Nei), जिसका अर्थ है “रीढ़ बिकाऊ नहीं है”। यह उनके अभियान के अडिग और विद्रोही स्वर का प्रतीक था। मतदान करने के बाद वह भावुक हो गईं और याद किया कि पिछले चुनावों में वे तीन लोग (माता, पिता और बेटी) एक साथ वोट डालने आते थे, लेकिन इस बार उनकी बेटी उनके साथ नहीं थी। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी यहाँ नहीं है, लेकिन बंगाल की जनता 4 मई को बैलेट बॉक्स के जरिए इसका जवाब देगी।”

EVM पर सवाल: मतदान की प्रक्रिया पर संदेह

केवल घेराव ही नहीं, रत्ना देबनाथ ने मतदान की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। अपना वोट डालने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का बटन दबाने पर प्रतिक्रिया बहुत धीमी थी। उन्होंने चुनाव अधिकारियों को इस बारे में सूचित करने की बात कही। इस शिकायत ने पहले से ही तनावपूर्ण माहौल में और अधिक संदेह पैदा कर दिया। पीड़िता के पिता ने इस चुनाव को “न्याय से इनकार” के खिलाफ थोपा गया मुकाबला बताया और कहा कि अब फैसला जनता की अदालत में है।

दूसरे चरण का व्यापक दृश्य: 142 सीटों पर भारी भागीदारी

पानीहाटी के तनाव के बीच, बंगाल के 7 जिलों की 142 सीटों पर मतदान की प्रक्रिया जारी रही। इस चरण में 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र थे। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे:

बता दें कि पहले चरण में 91.78 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान हुआ था, और दूसरे चरण में भी जनता का उत्साह इसी स्तर पर देखा गया।

पानीहाटी अब केवल एक सीट नहीं, एक प्रतीक है

पानीहाटी में हुई घटना ने यह साबित कर दिया है कि जब न्याय का अभियान चुनावी अखाड़े में उतरता है, तो प्रतिरोध भी उतना ही तीव्र होता है। रत्ना देबनाथ का अभियान महिला सुरक्षा, जवाबदेही और राजनीतिक प्रतिरोध का संगम बन चुका है। सत्ता पक्ष जहाँ इसे स्थानीय नाराजगी बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे न्याय की आवाज को दबाने की संगठित कोशिश मान रहा है। 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तब पता चलेगा कि बंगाल की जनता ने ‘रीढ़’ की इस लड़ाई को किस नजरिए से देखा है।

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