पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले सियासी पारा उबल रहा है, लेकिन इस बार गर्मी केवल नारों की नहीं, बल्कि ‘बारूद’ की है। दक्षिण 24 परगना के भांगर इलाके में भारी मात्रा में जिंदा बमों की बरामदगी ने सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव आयोग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लोकतंत्र के महापर्व के बीच हिंसा की आहट को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को 24 घंटे के भीतर सभी विस्फोटक जब्त करने का ‘डेडलाइन’ भरा आदेश दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे मामले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है, जिससे राज्य प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
भांगर में बमों का जखीरा: टीएमसी कार्यकर्ता के घर से बरामद हुए ‘मौत के सामान’
घटना की शुरुआत दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर से हुई, जहाँ पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर टीएमसी कार्यकर्ता रफीकुल इस्लाम के एक खाली पड़े घर में छापेमारी की। पुलिस भी तब दंग रह गई जब वहां से 100 जिंदा बम बरामद हुए। शानपुकुर इलाके में इस खबर के फैलते ही दहशत फैल गई। उत्तर काशीपुर थाने की पुलिस टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरे इलाके को सील कर दिया। बमों के इस जखीरे ने यह साफ कर दिया कि दूसरे चरण के मतदान के दौरान अशांति फैलाने की बड़ी साजिश रची जा रही थी।
EC का ‘अभूतपूर्व’ अल्टीमेटम: “बख्शा नहीं जाएगा कोई भी अधिकारी”
बमों की बरामदगी और मतदाताओं को डराने की खबरों पर निर्वाचन आयोग ने कड़ा प्रहार किया है। आयोग ने कोलकाता पुलिस आयुक्त के माध्यम से सभी डीसीपी, एसपी, ओसी और आईसी स्तर के अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी क्षेत्र में विस्फोटक पाया जाता है या मतदाताओं को धमकाने की रणनीति अपनाई जाती है, तो संबंधित थाने के प्रभारी (OC/IC) को “अभूतपूर्व परिणामों” का सामना करना पड़ेगा। आयोग ने पुलिस को केवल 24 घंटे का समय दिया है ताकि राज्य के कोने-कोने से विस्फोटक सामग्री को जब्त किया जा सके।
सियासी घमासान: टीएमसी बनाम आईएसएफ की जंग
इस बरामदगी ने तुरंत राजनीतिक रंग ले लिया है। स्थानीय आईएसएफ (ISF) इकाई ने सीधा आरोप लगाया है कि ये बम स्थानीय पंचायत सदस्य के इशारे पर जमा किए गए थे। आईएसएफ ने पुलिस से पंचायत सदस्य के घर की भी तलाशी लेने की मांग की है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए पलटवार किया है। टीएमसी का दावा है कि आईएसएफ कार्यकर्ताओं ने सत्तारूढ़ दल को बदनाम करने के लिए खुद ही उस खाली घर में बम रखे थे। इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भाषणों में अक्सर आने वाले नाम ‘शौकत मोल्ला’ का जिक्र भी बम निर्माण के संदर्भ में होने लगा है, जिससे मामला और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
डायमंड हार्बर में डरे मतदाता: वीडियो वायरल होने के बाद FIR दर्ज
सिर्फ बम ही नहीं, बल्कि मतदाताओं को धमकाने के मामले भी सामने आए हैं। डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से कुछ ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें असामाजिक तत्व मतदाताओं को डराते-धमकाते और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करते दिख रहे हैं। आयोग ने इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कड़ी धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें BNS की धारा 329(3), 351, 353, 174 और 3(5) जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार का डर या दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
NIA की जांच और भविष्य की चुनौती
मामले की गंभीरता और विस्फोटकों के अंतरराष्ट्रीय या अंतर्राज्यीय संबंधों की आशंका को देखते हुए जांच का जिम्मा एनआईए (NIA) को सौंपा गया है। यह कदम दर्शाता है कि केंद्र और चुनाव आयोग बंगाल में चुनाव को हर हाल में ‘भयमुक्त’ बनाना चाहते हैं। दूसरे चरण के मतदान के लिए अब राज्य प्रशासन पूरी तरह से निगरानी में है। एनआईए की एंट्री के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि बम बनाने और उन्हें सप्लाई करने वाले सिंडिकेट का पर्दाफाश होगा।
