मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है। Israel ने दावा किया है कि उसने हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम को एक टार्गेटेड हमले में मार गिराया है। यह हमला बेरूत में किया गया, जहां पिछले कुछ दिनों से लगातार बमबारी हो रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में अब तक 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच दो हफ्तों का सीजफायर लागू है, लेकिन लेबनान में लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही।
सीजफायर के बावजूद क्यों जारी हैं हमले?
अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर का दायरा सीमित बताया जा रहा है। Israel ने साफ कर दिया है कि यह समझौता केवल ईरान तक सीमित है और लेबनान में उसके ऑपरेशन जारी रहेंगे।
इजरायल का मानना है कि हिजबुल्लाह, ईरान का सबसे मजबूत प्रॉक्सी संगठन है और जब तक इसे कमजोर नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में स्थिरता संभव नहीं है। यही कारण है कि उसने लेबनान मोर्चे को अलग रखते हुए सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है।
कौन थे नईम कासिम?
नईम कासिम हिजबुल्लाह के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक थे, उनका जन्म 1953 में लेबनान के कफर किला में हुआ था, उन्होंने Lebanese University से रसायन विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की, राजनीति में आने से पहले वे केमिस्ट्री के शिक्षक रहे, 1982 में हिजबुल्लाह की स्थापना के समय से ही वह संगठन के वैचारिक स्तंभों में शामिल थे, 1991 में उन्हें उप-महासचिव बनाया गया और उन्होंने तीन दशकों तक हसन नसरल्लाह के साथ काम किया, 2024 में नसरल्लाह की मौत के बाद उन्हें संगठन का प्रमुख बनाया गया।
उन्होंने “Hezbollah: The Story from Within” नामक किताब भी लिखी, जिसमें संगठन की विचारधारा और इतिहास का जिक्र है।
लेबनान में तबाही का मंजर
बेरूत समेत लेबनान के कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। लगातार हो रही बमबारी से इमारतें तबाह हो गई हैं और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार:
- 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है
- सैकड़ों लोग घायल हैं
- कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है
हिजबुल्लाह ने इन हमलों का जवाब देने की चेतावनी दी है, लेकिन संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर लगातार हो रहे हमलों से उसकी रणनीतिक स्थिति कमजोर होती दिख रही है।
ईरान में भी नेतृत्व संकट
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब Iran खुद भी बड़े नेतृत्व संकट से गुजर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- अली ख़ामेनेई की मौत एक बड़े हवाई हमले में हो चुकी है
- उनके बाद मोजताब ख़ामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया
- अली लारीजानी और कई अन्य शीर्ष अधिकारियों की भी मौत की खबरें आई हैं
इन घटनाओं ने ईरान की सैन्य और राजनीतिक संरचना को झटका दिया है, जिसका असर उसके सहयोगी संगठनों, खासकर हिजबुल्लाह पर भी पड़ा है।
इजरायल की रणनीति क्या है?
इजराइल की मौजूदा रणनीति साफ नजर आ रही है—
- हिजबुल्लाह के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना
- संगठन की सैन्य क्षमता को कमजोर करना
- ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को कम करना
इजरायल का मानना है कि अगर हिजबुल्लाह को खत्म या कमजोर कर दिया जाता है, तो पूरे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहतर हो सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि मध्य पूर्व में तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है।
- लेबनान में युद्ध और तेज हो सकता है
- हिजबुल्लाह जवाबी कार्रवाई कर सकता है
- ईरान भी सीजफायर से पीछे हटने का फैसला ले सकता है
इस पूरे संकट ने यह दिखा दिया है कि एक सीमित सीजफायर भी पूरे क्षेत्र में शांति की गारंटी नहीं देता।
नईम क़सीम की कथित मौत और लेबनान में जारी हमले इस बात का संकेत हैं कि मध्य पूर्व का संकट अभी लंबा चल सकता है। इजराइल, ईरान और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच शक्ति संतुलन की यह लड़ाई अब कई मोर्चों पर फैल चुकी है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीति इस संघर्ष को शांत कर पाती है या फिर यह और बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा।
