सियासी घमासान: कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की जुबान फिसली और PM मोदी को कहा ‘आतंकवादी’ अब देने लगे सफ़ाई, चेन्नई की प्रेस कॉन्फ्रेंस से दिल्ली तक की पूरी कहानी

भारतीय राजनीति में शब्दों की मर्यादा अक्सर चुनावों के शोर में धुंधली हो जाती है, लेकिन जब देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष के मुख से देश के प्रधानमंत्री के लिए किसी बेहद आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग हो जाए, तो सियासत का तापमान सातवें आसमान पर पहुंचना लाजिमी है

खड़गे का विवादित बयान: पीएम मोदी को कहा 'आतंकवादी', फिर दी सफाई

भारतीय राजनीति में शब्दों की मर्यादा अक्सर चुनावों के शोर में धुंधली हो जाती है, लेकिन जब देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष के मुख से देश के प्रधानमंत्री के लिए किसी बेहद आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग हो जाए, तो सियासत का तापमान सातवें आसमान पर पहुंचना लाजिमी है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने आगामी मतदान से ठीक पहले एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में ‘आतंकवादी’ शब्द का प्रयोग किया, जिसके बाद न केवल भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अख्तियार किया, बल्कि खुद खड़गे को भी रक्षात्मक मुद्रा में आकर अपनी बात पर सफाई देनी पड़ी। यह घटनाक्रम केवल एक बयान भर नहीं है, बल्कि यह बताता है कि चुनावी रण में विचारधाराओं की लड़ाई अब किस हद तक व्यक्तिगत और तीखी हो चुकी है।

चेन्नई का वो प्रेस कॉन्फ्रेंस: अचानक कैसे बदला माहौल?

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए प्रचार अभियान अपने अंतिम चरण में था। मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार थमने वाला था और इसी सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चेन्नई में मीडिया से रूबरू थे। उनका मुख्य उद्देश्य बीजेपी-एआईएडीएमके (BJP-AIADMK) गठबंधन पर हमला करना और कांग्रेस-डीएमके गठबंधन की मजबूती को दर्शाना था। बातचीत के दौरान खड़गे द्रविड़ राजनीति के पुरोधाओं—पेरियार, अन्नादुरई और आम्बेडकर के सिद्धांतों का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी इन सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है। इसी प्रवाह में उन्होंने कहा कि मोदी की पार्टी समानता के सिद्धांत में विश्वास नहीं करती है और अचानक उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए ‘आतंकवादी’ शब्द का प्रयोग कर दिया। इस एक शब्द ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के शांत माहौल को अचानक असहज कर दिया और वहां मौजूद पत्रकारों के कान खड़े हो गए।

बीजेपी-एआईएडीएमके गठबंधन पर प्रहार और ‘सिद्धांतों’ की दुहाई

खड़गे ने अपने संबोधन में विशेष रूप से एआईएडीएमके (AIADMK) को निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी तमिलनाडु के गौरवशाली इतिहास और सामाजिक न्याय की पक्षधर रही है, वह बीजेपी के साथ कैसे जा सकती है? उन्होंने कहा, “वे बीजेपी के साथ कैसे गठबंधन कर सकते हैं? मोदी और उनकी पार्टी समता और न्याय में विश्वास नहीं करती है, और ये लोग उनके साथ शामिल हो रहे हैं। इसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।” खड़गे ने आरोप लगाया कि यह गठबंधन केवल सत्ता की लालसा के लिए है और इससे अन्नादुरई, आम्बेडकर और करुणानिधि जैसे महापुरुषों की विरासत को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस ‘अलोकतांत्रिक’ गठबंधन को नकार दें।

‘आतंकवादी’ या ‘आतंकित’? खड़गे की सफाई और संस्थानों का जिक्र

जैसे ही यह खबर मीडिया में फैली कि खड़गे ने प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहा है, राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। अपनी गलती का अहसास होते ही खड़गे ने तुरंत सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनके कहने का मतलब कुछ और था और उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “मैंने यह नहीं कहा कि वे एक आतंकवादी हैं। मैंने कहा कि वे ‘आतंकित’ कर रहे हैं।” उन्होंने आगे विस्तार से बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अपनी सत्ता का दुरुपयोग करके विपक्ष को डराते-धमकाते हैं। उन्होंने सीबीआई (CBI), ईडी (ED) और आईटी (Income Tax) जैसी केंद्रीय संस्थानों का हवाला देते हुए कहा कि ये सभी एजेंसियां आज सरकार के हाथों में हैं और इनका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों पर छापे मरवाकर उन्हें डराने के लिए किया जा रहा है।

धनबल और मसल पावर का आरोप: 11 सालों का लेखा-जोखा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खड़गे यहीं नहीं रुके। उन्होंने पिछले 11 सालों के एनडीए शासन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मोदी और शाह की जोड़ी ने चुनी हुई सरकारों को गिराने में महारत हासिल कर ली है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने कई राज्यों में विधायकों और राज्यसभा सांसदों को खरीदकर लोकतंत्र का मजाक बनाया है। खड़गे ने कहा, “इन लोगों ने धनबल और मसल पावर का नग्न प्रदर्शन किया है। जो सरकारें जनता द्वारा चुनी गई थीं, उन्हें साजिशों के तहत गिराया गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का एकमात्र उद्देश्य किसी भी कीमत पर सत्ता पर कब्जा बनाए रखना है, चाहे इसके लिए उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ही दांव पर क्यों न लगाना पड़े।

बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया: पीयूष गोयल का पलटवार

मल्लिकार्जुन खड़गे के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत और बेहद कड़ा पलटवार किया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि खड़गे का बयान न केवल प्रधानमंत्री का अपमान है, बल्कि यह देश की जनता और लोकतंत्र का भी अपमान है। गोयल ने कहा, “हमें शर्म आती है कि कांग्रेस पार्टी इतनी निचले स्तर पर गिर गई है। एक लोकतांत्रिक रूप से चुने हुए प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहना कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है।” उन्होंने खड़गे से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा कि तमिलनाडु की जनता और भारत के 142 करोड़ लोग इस अपमान को कभी नहीं भूलेंगे। बीजेपी ने इसे तमिल संस्कृति और गौरव पर भी हमला बताया और कहा कि चुनाव में जनता इसका करारा जवाब देगी।

चुनावी समीकरण और मतदान की घड़ी

तमिलनाडु की सभी सीटों पर 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है। ऐसे में प्रचार के आखिरी दिन आए इस विवादित बयान ने चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश की है। जहाँ कांग्रेस इसे बीजेपी द्वारा संस्थानों के दुरुपयोग का मुद्दा बनाकर पेश करना चाहती है, वहीं बीजेपी इसे प्रधानमंत्री के अपमान और कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति के तौर पर भुनाने में जुटी है। तमिलनाडु की जमीन पर द्रविड़ विचारधारा और राष्ट्रीय राजनीति का यह टकराव अब उस बिंदु पर पहुंच गया है जहाँ शब्दों की मर्यादा टूट चुकी है और अब सब कुछ 23 अप्रैल को ईवीएम (EVM) में कैद होने वाले जनता के फैसले पर टिका है।

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