नीतीश कुमार दिल्ली रवाना, बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन? जानें पूरी सियासी कहानी

बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है, राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होने की खबर ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है।

Nitish Kumar

बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होने की खबर ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार आज पटना से एयर इंडिया की फ्लाइट के जरिए दोपहर करीब 1:30 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे और लगभग 3:20 बजे राजधानी पहुंचेंगे। उनके इस दौरे को सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की सत्ता में संभावित बड़े बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

दरअसल, नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद अब उनका राज्य की सक्रिय राजनीति से हटकर राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इस प्रक्रिया के तहत उन्होंने पहले ही अपनी विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि अब बिहार की कमान किसके हाथ में जाएगी।

बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री राम कृपाल यादव ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद एक तय प्रक्रिया का पालन करना होता है और उसी के तहत नीतीश कुमार शपथ लेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। इसके लिए एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा और वही व्यक्ति राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेगा।

इस बीच मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी और मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय है और इसके बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यही वजह है कि अब बिहार में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।

अगर नए मुख्यमंत्री की बात करें तो इस रेस में सबसे आगे नाम सम्राट चौधरी का बताया जा रहा है। वर्तमान में उपमुख्यमंत्री के पद पर मौजूद सम्राट चौधरी बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और संगठन के भीतर भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उन्हें पश्चिम बंगाल चुनावों में भी स्टार प्रचारक बनाया गया था, जिससे उनकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और मजबूत हुई है। हालांकि, बीजेपी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिससे सस्पेंस बना हुआ है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नई सरकार के गठन का खाका लगभग तैयार हो चुका है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी कोटे से मुख्यमंत्री के अलावा 14-15 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जबकि जेडीयू को एक उपमुख्यमंत्री पद के साथ 15-16 मंत्री पद मिल सकते हैं। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष का पद भी जेडीयू के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी से जुड़े चिराग पासवान की पार्टी को दो मंत्री पद मिल सकते हैं, जबकि हम और आरएलएम जैसे छोटे दलों को एक-एक मंत्री पद दिए जाने की चर्चा है।

नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा सिर्फ राज्यसभा शपथ तक सीमित नहीं माना जा रहा। बताया जा रहा है कि दिल्ली में बीजेपी की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें बिहार की नई सरकार के गठन को लेकर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। इस बैठक में कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे और यहीं पर नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लग सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच विपक्ष भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी अब भी उम्मीद लगाए बैठी है कि राजनीतिक समीकरण आखिरी वक्त में बदल सकते हैं। पार्टी की ओर से जेडीयू को यह संकेत दिया गया है कि अगर नीतीश कुमार दिल्ली न जाएं तो वे संख्या बल का इंतजाम कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल ऐसा होता नजर नहीं आ रहा और एनडीए के भीतर ही नई सरकार बनने की संभावना अधिक मजबूत दिख रही है।

नीतीश कुमार के करीब दो दशकों के लंबे शासन के बाद अगर बिहार में उनके बिना सरकार बनती है, तो यह राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा। उन्होंने लंबे समय तक विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में सरकार चलाई है और अपनी छवि एक संतुलित और व्यावहारिक नेता के रूप में बनाई है। ऐसे में उनका सक्रिय राजनीति से हटना एक बड़े युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार शपथ लेने के बाद 12 अप्रैल तक पटना लौट सकते हैं और 13 अप्रैल को उनकी कैबिनेट की आखिरी बैठक भी हो सकती है। इसके बाद औपचारिक रूप से नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जहां एक तरफ सत्ता परिवर्तन की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हुए हैं। आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित होंगे, क्योंकि इन्हीं दिनों में यह तय होगा कि बिहार की बागडोर आखिर किसके हाथ में जाएगी।

फिलहाल इतना तय है कि नीतीश कुमार का दिल्ली जाना सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी अपने नए चेहरे का ऐलान कब करती है और क्या सम्राट चौधरी वाकई बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनते हैं या फिर आखिरी वक्त में कोई नया नाम सामने आता है।

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