आसनसोल में ‘केसरिया लहर’ की तैयारी: बीजेपी का सभी सातों सीटों पर क्लीन स्वीप का दावा, ममता के गढ़ में सेंध लगाने की रणनीति

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। बंगाल के औद्योगिक केंद्र 'आसनसोल' में इस बार चुनावी जंग बेहद दिलचस्प और आक्रामक हो गई है

क्या बीजेपी सातों सीटों पर करेगी क्लीन स्वीप?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। बंगाल के औद्योगिक केंद्र ‘आसनसोल’ में इस बार चुनावी जंग बेहद दिलचस्प और आक्रामक हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य के इस औद्योगिक बेल्ट में ‘क्लीन स्वीप’ करने का दावा करते हुए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने हुंकार भरते हुए कहा है कि आसनसोल की सभी सात विधानसभा सीटों पर इस बार कमल खिलेगा। भाजपा का तर्क है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन में पनपे कथित ‘माफिया राज’ और ‘घुसपैठ’ से जनता ऊब चुकी है और अब बदलाव चाहती है।

जी. किशन रेड्डी का हमला: माफिया राज और घुसपैठ को बनाया मुद्दा

चुनावी अभियान को धार देते हुए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बंगाल की धरती सालों से “गुंडागर्दी” और “माफिया संस्कृति” का दंश झेल रही है। रेड्डी के अनुसार, आसनसोल जैसे औद्योगिक क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है, जिसने न केवल जनता के भरोसे को तोड़ा है बल्कि औद्योगिक विकास को भी बाधित किया है। उन्होंने ‘घुसपैठ’ के मुद्दे को उठाते हुए दावा किया कि वर्तमान सरकार के संरक्षण में यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। भाजपा इस बार विकास और स्थिरता के वादे के साथ मतदाताओं के बीच जा रही है, यह दावा करते हुए कि जनता अब यथास्थिति को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

आसनसोल: बंगाल का औद्योगिक दिल और राजनीतिक रणभूमि

आसनसोल केवल एक लोकसभा क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की कोयला, लोहा और इस्पात अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस क्षेत्र के अंतर्गत सात महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र आते हैं: पांडबेश्वर, रानीगंज, जमुरिया, आसनसोल दक्षिण, आसनसोल उत्तर, कुल्टी और बाराबनी। आसनसोल-दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण ये सीटें न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी निर्णायक साबित होती हैं। यहाँ के मतदाताओं में बड़ी संख्या में श्रमिक, मध्यमवर्गीय परिवार और प्रवासी शामिल हैं, जो किसी भी दल की चुनावी किस्मत बदल सकते हैं। बीजेपी का मानना है कि इस क्षेत्र की औद्योगिक समस्याओं और बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर वह टीएमसी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकती है।

आसनसोल दक्षिण: अग्निमित्रा पॉल बनाम तापस बनर्जी की हाई-प्रोफाइल जंग

इस पूरे बेल्ट में सबसे कड़ी टक्कर आसनसोल दक्षिण सीट पर देखने को मिल रही है। यहाँ से बीजेपी की दिग्गज नेता और मौजूदा विधायक अग्निमित्रा पॉल अपनी सीट बचाने के लिए मैदान में हैं। अग्निमित्रा पॉल अपनी आक्रामक राजनीति और संगठनात्मक पकड़ के लिए जानी जाती हैं। उनके सामने तृणमूल कांग्रेस ने तापस बनर्जी को उतारा है। तापस बनर्जी एक अनुभवी नेता हैं, जो पहले भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और फिलहाल रानीगंज से विधायक हैं। यह मुकाबला केवल दो नेताओं के बीच नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं के बीच की जंग बन गया है। इस सीट का परिणाम पूरे औद्योगिक बेल्ट के राजनीतिक झुकाव का संकेत देगा।

2021 के प्रदर्शन से प्रेरणा: क्या भाजपा दोहरा पाएगी करिश्मा?

भाजपा का आसनसोल में आत्मविश्वास 2021 के विधानसभा चुनाव परिणामों पर आधारित है। हालांकि 2021 में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटों और 48.5% वोट शेयर के साथ शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन भाजपा ने भी राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी जगह पक्की की थी। भाजपा ने 77 सीटें जीती थीं और उसे 38.5% वोट मिले थे। 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता है। भाजपा की रणनीति उन क्षेत्रों को निशाना बनाने की है जहाँ सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) सबसे मजबूत है, और आसनसोल उनके इस ‘मिशन बंगाल’ के केंद्र में है।

23 और 29 अप्रैल को जनता करेगी फैसला

पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि 4 मई को चुनावी नतीजे घोषित होंगे। जी. किशन रेड्डी के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा आसनसोल को बंगाल विजय का प्रवेश द्वार मान रही है। जहाँ टीएमसी अपनी ‘कल्याणकारी योजनाओं’ के दम पर सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा ‘बदलाव’ के नारे के साथ मतदाताओं को गोलबंद कर रही है। क्या आसनसोल में वाकई ‘केसरिया लहर’ चलेगी या ममता बनर्जी की पकड़ मजबूत रहेगी, इसका फैसला अब जनता के हाथ में है।

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