महिलाओं की आर्थिक ताकत का बड़ा उछाल: भारत में ₹76 लाख करोड़ का क्रेडिट पोर्टफोलियो, नई रिपोर्ट का खुलासा

माइक्रोफाइनेंस से आगे बढ़कर अब रिटेल और बिजनेस लोन की ओर बढ़ रही हैं महिलाएं भारत की अर्थव्यवस्था में बढ़ रही भागीदारी और प्रभाव

नीति आयोग

भारत की आर्थिक संरचना में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। देश की महिलाएं अब केवल बचत या छोटे स्तर के वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे तेजी से औपचारिक क्रेडिट सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही हैं। हाल ही में नीति आयोग द्वारा जारी एक रिपोर्ट ने इस बदलाव को स्पष्ट रूप से सामने रखा है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिलाओं का कुल क्रेडिट पोर्टफोलियो ₹76 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो देश के कुल क्रेडिट सिस्टम का लगभग 26 प्रतिशत है। यह आंकड़ा न केवल महिलाओं की वित्तीय भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वे अब अर्थव्यवस्था के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

यह रिपोर्ट “From Borrowers to Builders: Women and India’s Evolving Credit Market” शीर्षक से जारी की गई, जिसे नीति आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर ने नई दिल्ली में लॉन्च किया। इस रिपोर्ट को महिला उद्यमिता मंच (Women Entrepreneurship Platform) के तहत TransUnion CIBIL और Micro Save Consulting के सहयोग से तैयार किया गया है।

महिलाओं की क्रेडिट क्षमता में तेज वृद्धि

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद से महिलाओं की क्रेडिट क्षमता में 4.8 गुना की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि महिलाएं अब केवल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच ही नहीं बना रही हैं, बल्कि उनका उपयोग भी अधिक प्रभावी तरीके से कर रही हैं।

इसका मतलब यह है कि भारत में महिलाएं अब आर्थिक रूप से अधिक सक्षम हो रही हैं और वे वित्तीय निर्णय लेने में पहले से कहीं अधिक सक्रिय हो चुकी हैं

पूरे देश में बढ़ रही है क्रेडिट तक पहुंच

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिलाओं के बीच सक्रिय लोन लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दिसंबर 2017 से दिसंबर 2025 के बीच महिलाओं के सक्रिय उधारकर्ताओं की संख्या में 9 प्रतिशत की कंपाउंड वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है।

इसी अवधि में महिलाओं की क्रेडिट तक पहुंच 19 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है। कुल बकाया ऋण 2017 में ₹16 लाख करोड़ से बढ़कर 2025 तक ₹76 लाख करोड़ हो गया है।

भारत में लगभग 45 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जो क्रेडिट के लिए पात्र मानी जाती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में अभी भी काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

महिलाओं की आर्थिक भूमिका पर बड़ा असर

रिपोर्ट लॉन्च के दौरान निधि छिब्बर ने कहा कि जब बाजार में भागीदारी व्यापक और प्रभावी होती है, तो आर्थिक विकास तेजी से बढ़ता है।

उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और औपचारिक लेंडिंग सिस्टम के एकीकरण ने वित्तीय भागीदारी को पूरी तरह बदल दिया है। अब महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से रिकॉर्ड और फाइनेंस किया जा रहा है।

माइक्रोफाइनेंस से आगे बढ़ती महिलाएं

रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह है कि महिलाएं अब केवल छोटे माइक्रोफाइनेंस लोन तक सीमित नहीं हैं। वे अब रिटेल और कमर्शियल क्रेडिट प्रोडक्ट्स की ओर भी बढ़ रही हैं।

करीब 19 प्रतिशत माइक्रोफाइनेंस उधारकर्ता अब बड़े लोन उत्पादों का भी उपयोग कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि महिलाएं धीरे-धीरे बड़े वित्तीय निर्णयों की ओर बढ़ रही हैं।

महिला उद्यमियों के बीच बिजनेस लोन की मांग में तेजी से वृद्धि देखी गई है। 2022 से 2025 के बीच महिलाओं को दिए गए बिजनेस लोन में 31 प्रतिशत की CAGR दर्ज की गई, जबकि कुल कमर्शियल लेंडिंग की वृद्धि दर 17 प्रतिशत रही।

यह दर्शाता है कि महिलाएं अब उद्यमिता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं और अपनी आर्थिक पहचान बना रही हैं।

विशेषज्ञों की राय

एना रॉय, जो महिला उद्यमिता मंच की मिशन डायरेक्टर भी हैं, ने कहा कि महिलाओं के क्रेडिट उपयोग में विविधता भारत की आर्थिक संरचना में एक बड़ा बदलाव दिखाती है।

उन्होंने कहा कि यह केवल क्रेडिट तक पहुंच बढ़ने की बात नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि महिलाएं अब विभिन्न प्रकार के वित्तीय उत्पादों का उपयोग कर रही हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डिजिटलाइजेशन ने महिलाओं के लिए वित्तीय सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाया है, पहचान सत्यापन, डिजिटल पेमेंट, बीमा और लोन सेवाओं में तेजी से बदलाव के कारण महिलाएं अब अनौपचारिक चैनलों से निकलकर औपचारिक वित्तीय प्रणाली में शामिल हो रही हैं।

भौगोलिक विस्तार

पहले जहां महिलाओं की क्रेडिट पहुंच दक्षिण और पश्चिम भारत तक सीमित थी, अब यह उत्तर भारत के राज्यों जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश में भी तेजी से बढ़ रही है।

यह बदलाव इस बात का संकेत है कि देश के हर हिस्से में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत हो रही है।

महिलाओं के बीच पर्सनल लोन और गोल्ड लोन सबसे लोकप्रिय हैं। इसके अलावा हाउसिंग लोन में भी तेजी देखी जा रही है, जो यह दर्शाता है कि महिलाएं अब संपत्ति निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।

इस रिपोर्ट में लगभग 16 करोड़ सक्रिय महिला उधारकर्ताओं के डेटा का विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही 161 ग्रामीण महिला उद्यमियों पर प्राथमिक रिसर्च भी की गई है।

यह पहली बार है जब माइक्रोफाइनेंस डेटा को भी इस तरह के अध्ययन में शामिल किया गया है, जिससे महिलाओं की वित्तीय स्थिति का अधिक व्यापक विश्लेषण संभव हो पाया है।

भविष्य की दिशा

यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दिखाती है कि भारत में महिलाएं अब आर्थिक रूप से अधिक सशक्त हो रही हैं। हालांकि, इस गति को बनाए रखने के लिए नीतिगत सुधार और बेहतर वित्तीय ढांचे की जरूरत होगी।

अगर यह रफ्तार जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में महिलाएं भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बन सकती हैं।

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