अलकनंदा-भागीरथी पर नई पनबिजली परियोजनाओं पर रोक, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा

अलकनंदा और भागीरथी नदियों पर कोई नई पनबिजली परियोजना शुरू नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि पहले से चल रही सात परियोजनाओं के अलावा किसी नई परियोजना को मंजूरी नहीं मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक विस्तार

पर्यावरण और धार्मिक महत्व को देखते हुए अब अलकनंदा और भागीरथी नदियों पर कोई नई पनबिजली परियोजना शुरू नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि पहले से चल रही सात परियोजनाओं के अलावा किसी नई परियोजना को मंजूरी नहीं मिलेगी। इनमें से कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ का काम अंतिम चरण में है।

यह मामला 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद शुरू हुआ था, जब उत्तराखंड में पनबिजली परियोजनाओं के पर्यावरण पर असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेकर हलफनामा दाखिल करने को कहा था। अब सरकार ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय से चर्चा के बाद अपना जवाब दाखिल किया है।

सरकार ने साफ कहा है कि गंगा के ऊपरी क्षेत्र यानी अलकनंदा और भागीरथी नदी बेसिन में अब कोई नई पनबिजली परियोजना मंजूर नहीं होगी।

सरकार ने जिन सात परियोजनाओं का जिक्र किया है, उनमें टिहरी स्टेज-2 परियोजना पहले ही चालू हो चुकी है। तपोवन विष्णुगाद परियोजना का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। विष्णुगाद पीपलकोटी परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण पूरा हो गया है।

इसके अलावा सिंगोली भटवारी परियोजना 2020 में शुरू हो चुकी है। फाटा ब्यूंग परियोजना का करीब 74 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। मधमहेश्वर परियोजना 2024 में चालू हुई थी, जबकि कालीगंगा-2 परियोजना 2022 से काम कर रही है।

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