अमित शाह ने “असामान्य जनसंख्या बदलाव” की जांच के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठ और इससे जुड़े अन्य कारण देश के कई हिस्सों में जनसंख्या के स्वरूप को बदल रहे हैं। गृह मंत्री ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, देश की संप्रभुता और सामाजिक संतुलन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह फैसला प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 पर किए गए वादे के तहत लिया गया है। इसके बाद गृह मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से इस समिति का गठन कर दिया है। यह समिति पूरे देश में जनसंख्या बदलाव के पैटर्न का अध्ययन करेगी।
जस्टिस नाओलेकर करेंगे समिति की अगुवाई
सरकार ने रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज Justice Prakash Prabhakar Naolekar को समिति का अध्यक्ष बनाया है। इसके अलावा पूर्व IAS अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, रिटायर्ड IPS अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव, अर्थशास्त्री डॉ. शामिका रवि और जनगणना आयुक्त को भी समिति में शामिल किया गया है। गृह मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी (Foreigners-I) सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।
सरकार का कहना है कि समिति में कानूनी, प्रशासनिक और आर्थिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि हर पहलू से मामले का अध्ययन किया जा सके।
जनसंख्या बदलाव पर होगी विस्तृत जांच
समिति पूरे देश में जनसंख्या में हो रहे बदलावों का अध्ययन करेगी। खासतौर पर उन बदलावों पर ध्यान दिया जाएगा जिन्हें सरकार अवैध घुसपैठ और “असामान्य कारणों” से जोड़ रही है। समिति धार्मिक और सामाजिक समूहों में हो रहे बदलावों का भी विश्लेषण करेगी और उन इलाकों की पहचान करेगी जहां यह बदलाव ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।
इसके अलावा आदिवासी समुदायों पर पड़ने वाले प्रभाव का भी अध्ययन किया जाएगा। समिति क्षेत्रीय जनसंख्या और प्रशासन पर असर की समीक्षा कर सरकार को तय समय सीमा में सुझाव देगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा मुद्दा
अमित शाह ने कहा कि जनसंख्या में असामान्य बदलाव केवल सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार सिर्फ अध्ययन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि आगे की नीति तैयार करने पर भी काम करेगी।
समिति सरकार को ठोस सुझाव देगी, जिनके आधार पर भविष्य में नई नीतियां बनाई जा सकती हैं।
राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना
इस घोषणा के बाद राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि अवैध घुसपैठ और जनसंख्या बदलाव का मुद्दा कई राज्यों में लंबे समय से संवेदनशील रहा है। खासकर सीमावर्ती राज्यों में इस विषय पर लगातार चर्चा होती रही है।
सरकार ने अब इस मुद्दे को सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि समिति की रिपोर्ट भविष्य में प्रवासन और जनसंख्या निगरानी से जुड़ी सरकारी नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
