दिल्ली में धूल प्रदूषण और शहरी जलभराव से निपटने के लिए बड़े सड़क पुनर्विकास योजना की शुरुआत

दिल्ली  में जल्द ही सड़कों का बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उपराज्यपाल Taranjit Singh Sandhu ने राजधानी के पांच प्रमुख रोड कॉरिडोर के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) प्लान की समीक्षा की।

दिल्ली में धूल प्रदूषण

दिल्ली में धूल प्रदूषण

दिल्ली  में जल्द ही सड़कों का बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उपराज्यपाल Taranjit Singh Sandhu ने राजधानी के पांच प्रमुख रोड कॉरिडोर के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) प्लान की समीक्षा की। इस योजना का उद्देश्य दिल्ली में वायु प्रदूषण कम करना, जलभराव की समस्या रोकना और पैदल चलने वालों के लिए बेहतर सुविधाएं तैयार करना है।

उपराज्यपाल ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर और विभिन्न सड़क एजेंसियों के साथ बैठक कर पूरे प्रोजेक्ट की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में इन पांच सड़कों की योजना और काम को बेहतर तरीके से लागू करने पर चर्चा हुई। ये सड़कें भारी ट्रैफिक, धूल, जाम और खराब ड्रेनेज जैसी समस्याओं से प्रभावित रहती हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना पर जल्द काम शुरू हो सकता है।

साफ हवा और मजबूत सड़क डिजाइन पर जोर

रीडेवलपमेंट प्लान का मुख्य फोकस सड़क की धूल को कम करना है, जो दिल्ली के प्रदूषण का बड़ा कारण मानी जाती है। उपराज्यपाल ने कहा कि परियोजना में Commission for Air Quality Management के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।

इस योजना में सड़कों को ऐसे डिजाइन किया जाएगा जिससे धूल कम बने और बार-बार सफाई की जरूरत भी कम पड़े। उद्देश्य सड़कों को लंबे समय तक साफ और टिकाऊ बनाना है।

जलभराव रोकने के लिए नया ड्रेनेज सिस्टम

पांचों कॉरिडोर में नया स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा, ताकि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या न हो। बेहतर ड्रेनेज से बारिश के बाद सड़कों पर मिट्टी और गाद जमा नहीं होगी, जिससे सड़क सूखने के बाद धूल भी कम उड़ेगी। इससे मानसून में ट्रैफिक व्यवस्था भी बेहतर रहेगी।

ग्रीन वर्ज, साइकिल ट्रैक और पैदल रास्ते

परियोजना के तहत सड़कों के बीच हरे-भरे ग्रीन वर्ज बनाए जाएंगे, जिनमें घास लगाई जाएगी। इनके रखरखाव के लिए पाइप आधारित सिंचाई व्यवस्था होगी, जिससे पानी के टैंकरों की जरूरत कम पड़ेगी।

इसके अलावा पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ, साइकिल ट्रैक, सार्वजनिक सुविधाएं और विश्राम स्थल भी बनाए जाएंगे। उपराज्यपाल ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया और कहा कि इससे सड़कों की देखभाल और सुरक्षा बेहतर होगी।

अगर यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो दिल्ली की प्रमुख सड़कें पर्यावरण, यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं के लिहाज से नई पहचान हासिल कर सकती हैं।

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