गुरिंदरवीर सिंह बने भारत के सबसे तेज धावक, भारतीय स्प्रिंटिंग की ‘असंभव’ मानी जाने वाली बाधा को तोड़ा

गुरिंदरवीर सिंह ने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में 10.09 सेकेंड का शानदार समय निकालकर इतिहास रच दिया। वह 10.10 सेकेंड की बाधा तोड़ने वाले पहले भारतीय धावक बन गए हैं।

गुरिंदरवीर सिंह बने भारत के सबसे तेज धावक

गुरिंदरवीर सिंह बने भारत के सबसे तेज धावक

भारतीय एथलेटिक्स ने रांची में एक ऐतिहासिक पल देखा, जब गुरिंदरवीर सिंह ने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में 10.09 सेकेंड का शानदार समय निकालकर इतिहास रच दिया। वह 10.10 सेकेंड की बाधा तोड़ने वाले पहले भारतीय धावक बन गए हैं।

यह उपलब्धि रांची के बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में आयोजित 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप के दौरान हासिल हुई। पंजाब के इस स्प्रिंटर ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा और साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई भी किया। उनकी इस उपलब्धि ने उस लंबे समय से चली आ रही धारणा को भी चुनौती दी कि भारतीय एथलीट विश्वस्तरीय स्प्रिंटिंग में सफल नहीं हो सकते।

गुरिंदरवीर और साथी धावक अनिमेष कुजूर के बीच भारत का सबसे तेज धावक बनने की जंग पिछले 24 घंटों में बेहद रोमांचक रही। शुक्रवार के सेमीफाइनल में गुरिंदरवीर ने 10.17 सेकेंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद अनिमेष ने 10.15 सेकेंड दौड़कर रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

हालांकि यह रिकॉर्ड ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया। फाइनल में गुरिंदरवीर ने जीवन की सबसे बेहतरीन दौड़ लगाई। उन्होंने शुरुआत से ही तेज रफ्तार बनाए रखी और 10.09 सेकेंड में फिनिश लाइन पार कर दी, जबकि अनिमेष 10.20 सेकेंड के साथ दूसरे स्थान पर रहे। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने महसूस किया कि वे भारतीय एथलेटिक्स का ऐतिहासिक क्षण देख रहे हैं।

गुरिंदरवीर के लिए यह जीत केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं थी। उन्होंने खुलकर बताया कि किशोरावस्था में कई कोचों ने उन्हें 100 मीटर छोड़कर 400 मीटर में जाने की सलाह दी थी। उनसे कहा गया था कि भारतीय धावकों का स्प्रिंटिंग में भविष्य नहीं है। लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी प्रेरणा बना लिया।

दौड़ खत्म होने के बाद गुरिंदरवीर ने अपना रेसिंग बिब कैमरों की ओर दिखाया, जिसके पीछे लिखा था — “Wait, I’m still standing” और नीचे 10.10 का लक्ष्य रेखांकित था। यह संदेश उनकी संघर्ष यात्रा और भारतीय स्प्रिंटिंग के आत्मविश्वास दोनों को दर्शाता है।

पंजाब के जालंधर जिले के पत्याल गांव से आने वाले गुरिंदरवीर ने छठी कक्षा से एथलेटिक्स शुरू की थी। उनके पिता कमलजीत सिंह पंजाब पुलिस में एएसआई हैं और पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी भी रह चुके हैं। शुरुआती प्रशिक्षण के बाद उन्होंने कोच सरबजीत सिंह हैप्पी के मार्गदर्शन में खुद को भारत के बेहतरीन स्प्रिंटर्स में शामिल किया।

उनकी इस उपलब्धि की तुलना अब महान धावक मिल्खा सिंह से की जाने लगी है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि गुरिंदरवीर की अंतरराष्ट्रीय यात्रा अभी सिर्फ शुरू हुई है। विश्व रिकॉर्ड अब भी उसैन बोल्ट के नाम 9.58 सेकेंड है, जबकि एशियाई रिकॉर्ड चीन के सू बिंगतियान के नाम 9.83 सेकेंड है।

फिर भी भारतीय एथलेटिक्स के लिए गुरिंदरवीर सिंह की 10.09 सेकेंड की यह दौड़ उस ऐतिहासिक पल के रूप में याद की जाएगी, जिसने भारतीय स्प्रिंटिंग की वर्षों पुरानी मानसिक बाधा को तोड़ दिया।

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