गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा प्लान, बस्तर में अब सुरक्षा के साथ विकास पर फोकस

गृहमंत्री अमित शाह तीन दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे हैं। उनका यह दौरा सिर्फ सुरक्षा समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि बस्तर में विकास और लोगों का भरोसा बढ़ाने की नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अमित शाह के दौरे से सुरक्षा,

अमित शाह के दौरे से सुरक्षा,

गृहमंत्री अमित शाह तीन दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे हैं। उनका यह दौरा सिर्फ सुरक्षा समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि बस्तर में विकास और लोगों का भरोसा बढ़ाने की नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

लंबे समय तक नक्सल हिंसा के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर में अब सरकार सुरक्षा के साथ विकास पर भी जोर दे रही है। अमित शाह आज बस्तर में नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों, शहीद जवानों के परिजनों और समाज प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि सरकार स्थानीय लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है।

केंद्र सरकार लगातार कह रही है कि देश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने बस्तर में कई बड़े ऑपरेशन किए हैं, जिनमें कई बड़े नक्सली मारे गए या गिरफ्तार हुए। अब सरकार चाहती है कि जिन इलाकों में पहले विकास नहीं पहुंच पाया, वहां सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सुविधाएं तेजी से पहुंचें।

अमित शाह रायपुर में डायल-112 सेवा के लिए 400 नए वाहनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच गांवों तक तेज होगी। साथ ही प्रदेश के सभी 33 जिलों में मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट शुरू करने की तैयारी है, ताकि घटनास्थल पर ही जांच हो सके।

बस्तर दौरे के दौरान अमित शाह नेतानार में जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन भी करेंगे। सरकार इसे ग्रामीण और आदिवासी इलाकों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने की बड़ी पहल मान रही है।

इसके अलावा अमित शाह ‘बस्तर के संग’ लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इसे आदिवासी संस्कृति और स्थानीय परंपराओं को सम्मान देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

19 मई को जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक भी होगी। इसमें Yogi Adityanath, Mohan Yadav और Pushkar Singh Dhami भी शामिल होंगे। बैठक में सुरक्षा, विकास और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

सरकार अब बस्तर में “सुरक्षा + विकास + विश्वास” के मॉडल पर काम करती दिख रही है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार बस्तर को नक्सलवाद की पहचान से बाहर निकालकर विकास और स्थिरता के नए मॉडल के रूप में स्थापित करना चाहती है।

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