भारत दुनिया की पांचवीं सबसे अधिक डिजिटल अर्थव्यवस्था बन गया है। उसने डिजिटल विकास के मामले में कई विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है। यह जानकारी ICRIER-Prosus Centre for Internet and Digital Economy (IPCIDE) की स्टेट ऑफ इंडियाज़ डिजिटल इकोनॉमी (SIDE) 2026 रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, CHIPS-Combined Index में भारत को पांचवां स्थान मिला है। इस सूची में भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन, सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) हैं। वर्ष 2025 में भारत आठवें स्थान पर था, लेकिन एक साल में तीन पायदान ऊपर चढ़कर पांचवें स्थान पर पहुंच गया।
क्या है CHIPS Index?
CHIPS Index दुनिया की 71 अर्थव्यवस्थाओं का मूल्यांकन करता है। यह केवल इंटरनेट की उपलब्धता नहीं, बल्कि यह भी देखता है कि किसी देश में डिजिटल तकनीक का उपयोग कितनी गहराई से हो रहा है। इसके पांच प्रमुख आधार हैं—कनेक्टिविटी, डिजिटल उपयोग, नवाचार (इनोवेशन), सुरक्षा (प्रोटेक्शन) और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी)।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने इन कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसकी बड़ी वजह मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑनलाइन सेवाओं का तेजी से बढ़ता उपयोग है। आज डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल शासन और आर्थिक गतिविधियों में पहले से कहीं अधिक हो रहा है।
दुनिया में बदल रहा है डिजिटल शक्ति का संतुलन
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक डिजिटल परिदृश्य अब “ट्राइपोलर” (तीन प्रमुख केंद्रों वाला) बनता जा रहा है। पहले डिजिटल शक्ति मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप के नेतृत्व वाले देशों के पास थी, लेकिन अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र भी तेजी से प्रभावशाली बन रहा है।
इसका मतलब है कि डिजिटल ताकत अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में फैल रही है। खासकर एशिया डिजिटल विकास और तकनीकी ढांचे को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने बढ़ाई भारत की ताकत
भारत की इस उपलब्धि के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपनाना और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे का विस्तार प्रमुख कारण हैं।
इन बदलावों से सरकारी सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार हुआ है। साथ ही, लोगों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग आसान हुआ है और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्षमता भी बढ़ी है।
SIDE 2026 रिपोर्ट के अनुसार, आज डिजिटल ताकत केवल इंटरनेट कनेक्शन पर नहीं, बल्कि नवाचार, तकनीक के प्रभावी उपयोग और टिकाऊ विकास पर निर्भर करती है। ऐसे में दुनिया की पांचवीं सबसे डिजिटल अर्थव्यवस्था बनकर भारत ने वैश्विक डिजिटल व्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।
