तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में एक बड़ी सुरक्षा चूक और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस सूत्रों ने पुष्टि की है कि फर्जी पहचान दस्तावेजों के जरिए अवैध रूप से मतदान करने के आरोप में अब तक लगभग 25 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब इमिग्रेशन विभाग के अधिकारियों ने विदेश जा रहे यात्रियों की उंगलियों पर चुनावी स्याही (Indelible Ink) के निशान देखे।
कैसे पकड़े गए विदेशी नागरिक? (अंगुली की स्याही बनी सबूत)
यह पूरा मामला तब खुला जब विदेशी पासपोर्ट रखने वाले कुछ लोग हवाई अड्डों से देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BoI) के अधिकारियों ने चेन्नई और मदुरै हवाई अड्डों पर जांच के दौरान देखा कि इन यात्रियों की तर्जनी उंगली पर मतदान वाली अमिट स्याही लगी हुई थी। विदेशी पासपोर्ट धारक होने के बावजूद उंगली पर स्याही का होना इस बात का सीधा सबूत था कि उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में मतदान किया है।
किन देशों के नागरिक हैं शामिल?
जांचकर्ताओं के अनुसार, पकड़े गए संदिग्धों में बहुसंख्यक श्रीलंकाई नागरिक हैं। हालांकि, इस समूह में ब्रिटिश और कनाडाई नागरिक भी शामिल हैं। इनमें से कई भारतीय मूल के लोग हैं जिन्होंने विदेशी नागरिकता ले ली है। उदाहरण के तौर पर, 2015 में ब्रिटिश पासपोर्ट हासिल करने वाले एक व्यक्ति ने पट्टुकोट्टई निर्वाचन क्षेत्र में वोट डाला और उसे लंदन की उड़ान भरते समय चेन्नई हवाई अड्डे पर पकड़ लिया गया।
सख्त कानूनी कार्रवाई और धाराओं का जाल
इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act), 1950 के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद कितने विदेशी नागरिक राज्य में पहुंचे और उनमें से कितने अभी भी देश के भीतर छिपे हुए हैं।
पुडुचेरी और चेन्नई में सबसे ज्यादा मामले
हिरासत में लिए गए अधिकांश लोग चेन्नई से हैं, लेकिन दो विदेशी नागरिकों की पहचान पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश में मतदान करने के रूप में भी हुई है। खुफिया जानकारी के मुताबिक, कई विदेशी नागरिक स्याही के मिटने का इंतजार कर रहे थे ताकि वे बिना पकड़े देश छोड़ सकें। डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साधनों के जरिए अब उनके मतदान की पुष्टि की जा रही है।
चुनाव आयोग को सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट
इस धोखाधड़ी का चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ेगा, इस पर अधिकारियों ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी गई है। गौरतलब है कि 2025 में भी इमिग्रेशन अधिकारियों ने लगभग 100 विदेशियों के नाम मतदाता सूची से हटाने का अनुरोध किया था। इस साल भी अब तक 60 विदेशियों के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं।
क्या कहते हैं चुनाव आयोग (ECI) के नियम?
चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, ‘प्रवासी निर्वाचक’ (Overseas Elector) केवल वही हो सकता है जो भारत का नागरिक हो और उसने किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त न की हो।
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अनिवासी भारतीय (NRI): वे मतदान के लिए पंजीकरण कर सकते हैं, लेकिन उन्हें मतदान केंद्र पर अपना मूल भारतीय पासपोर्ट दिखाना अनिवार्य है।
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विदेशी नागरिक: जिन लोगों ने स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता त्याग दी है या विदेशी पासपोर्ट हासिल कर लिया है, उन्हें भारत में वोट देने का कोई अधिकार नहीं है।
यह घटना चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच एजेंसियां अब उन नेटवर्क का पता लगा रही हैं जिन्होंने इन विदेशी नागरिकों को फर्जी मतदाता पहचान पत्र (EPIC) दिलाने में मदद की। संभावना जताई जा रही है कि अभी और भी कई ऐसे विदेशी नागरिक हो सकते हैं जिन्होंने अवैध रूप से वोट डाला है और वे अभी तक भारत से बाहर नहीं गए हैं।
