पहल्गाम हमले के बाद बढ़ा तनाव, जानिए भारत और पाकिस्तान की परमाणु ताकत और रणनीति में कितना अंतर

पहल्गाम में कम से कम 26 नागरिकों की हत्या कर दी, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया। इसके जवाब में India ने कई कड़े कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना भी शामिल था।

पहल्गाम हमले के बाद बढ़ा तनाव

पहल्गाम हमले के बाद बढ़ा तनाव

 पहलगाम में कम से कम 26 नागरिकों की हत्या कर दी, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया। इसके जवाब में India ने कई कड़े कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना भी शामिल था। इसके बाद पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गईं। भारत की संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच पाकिस्तान ने कई बार अपने परमाणु हथियारों का जिक्र किया, जिससे दुनिया भर में परमाणु टकराव को लेकर चिंता बढ़ गई।

इस बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दोनों देशों की परमाणु ताकत और उनकी अलग-अलग परमाणु नीतियों पर ध्यान खींचा है।

दुनिया में कितने परमाणु हथियार हैं?

Stockholm International Peace Research Institute की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, 2024 की शुरुआत तक दुनिया के 9 देशों के पास करीब 12,121 परमाणु हथियार थे। इनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल शामिल हैं। इनमें से लगभग 9,585 हथियार ऑपरेशन के लिए तैयार माने गए, जबकि करीब 3,904 परमाणु वारहेड सक्रिय सैन्य बलों के पास तैनात थे।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और रूस ने पुराने वारहेड हटाए हैं, जिससे कुल संख्या में कमी आई है, लेकिन दोनों देश लगातार अपने परमाणु सिस्टम, मिसाइल, पनडुब्बी और लड़ाकू विमानों को आधुनिक बना रहे हैं। दुनिया के लगभग 90 फीसदी परमाणु हथियार सिर्फ अमेरिका और रूस के पास हैं।

भारत की परमाणु ताकत

SIPRI के अनुसार 2024 की शुरुआत में भारत के पास लगभग 172 परमाणु हथियार थे, जो 2023 में 164 थे। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक, मारक क्षमता और रणनीतिक तैयारी के मामले में भारत पाकिस्तान से आगे है।

भारत के पास परमाणु हथियार दागने के लिए तीनों तरह की क्षमता है—हवाई, जमीन और समुद्र आधारित। भारत लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों और परमाणु पनडुब्बियों के जरिए परमाणु हमला कर सकता है।

भारत ने पहला परमाणु परीक्षण 18 मई 1974 को राजस्थान के Pokhran में किया था, जिसे “Smiling Buddha” नाम दिया गया। इसके बाद 1998 में “Operation Shakti” के तहत पांच परमाणु परीक्षण कर भारत ने खुद को औपचारिक रूप से परमाणु शक्ति घोषित किया।

भारत की परमाणु नीति “No First Use” यानी “पहले इस्तेमाल नहीं” के सिद्धांत पर आधारित है। इसका मतलब है कि भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन अगर उस पर परमाणु हमला हुआ तो वह जोरदार जवाब देगा। भारत “Credible Minimum Deterrence” यानी न्यूनतम लेकिन भरोसेमंद परमाणु क्षमता बनाए रखने की नीति अपनाता है।

पाकिस्तान की परमाणु ताकत

SIPRI के अनुसार 2024 की शुरुआत में पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु हथियार थे। पाकिस्तान ने 28 मई 1998 को बलूचिस्तान के चागाई इलाके में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था।

पाकिस्तान के पास भी जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता है। उसके पास बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, लड़ाकू विमान और समुद्री सिस्टम मौजूद हैं। पाकिस्तान की परमाणु नीति भारत से अलग है क्योंकि उसने “No First Use” नीति नहीं अपनाई है। यानी पाकिस्तान जरूरत पड़ने पर पहले परमाणु हमला करने का विकल्प खुला रखता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान ऐसा इसलिए करता है क्योंकि वह पारंपरिक सैन्य ताकत में खुद को भारत से कमजोर मानता है।

भारत और पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता

भारत के पास Rafale, मिराज-2000 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमान हैं जो परमाणु हथियार ले जा सकते हैं। इसके अलावा भारत के पास पृथ्वी-II, अग्नि-I, अग्नि-II, अग्नि-III और अग्नि-IV जैसी मिसाइलें भी हैं। भारत की परमाणु पनडुब्बियों में INS Arihant और INS अरिघात शामिल हैं।

वहीं पाकिस्तान के पास मिराज-III, मिराज-V, F-16 और JF-17 जैसे विमान हैं। उसकी मिसाइलों में अब्दाली, गजनवी, शाहीन और गौरी जैसी मिसाइलें शामिल हैं। पाकिस्तान ने अबाबील मिसाइल का भी परीक्षण किया है, जो एक साथ कई वारहेड ले जाने में सक्षम बताई जाती है।

निष्कर्ष

भारत और पाकिस्तान के पास लगभग बराबर संख्या में परमाणु हथियार हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की परमाणु क्षमता तकनीकी रूप से ज्यादा उन्नत और मजबूत मानी जाती है। दोनों देशों की परमाणु नीतियां भी काफी अलग हैं। भारत खुद को जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में पेश करता है, जबकि पाकिस्तान पहले परमाणु इस्तेमाल का विकल्प खुला रखता है।

इसी वजह से दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे संवेदनशील परमाणु क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां किसी भी सैन्य तनाव के बढ़ने से गंभीर और विनाशकारी स्थिति पैदा हो सकती है।

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