पश्चिम बंगाल के राजनीतिक मंच पर उस समय बेहद भावुक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब पीएम मोदी ने 98 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता Makhanlal Sarkar के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लिया। यह पल सिर्फ एक सम्मान का प्रतीक नहीं था, बल्कि उन दशकों लंबे संघर्षों को नमन था, जिन्होंने बंगाल में राष्ट्रवादी राजनीति की नींव मजबूत की।
माखनलाल सरकार उन चुनिंदा कार्यकर्ताओं में रहे हैं जिन्होंने उस दौर में राष्ट्रवाद का झंडा उठाया, जब पश्चिम बंगाल में वामपंथी राजनीति का दबदबा था और भाजपा जैसी विचारधारा के लिए जमीन तैयार करना बेहद कठिन माना जाता था। वर्ष 1952 में उन्होंने Syama Prasad Mukherjee के साथ कश्मीर में तिरंगे और राष्ट्र की एकता के समर्थन में आंदोलन किया था। इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। यह घटना उनके राष्ट्रवादी समर्पण का बड़ा उदाहरण मानी जाती है।
इसके बाद 1980 में भाजपा के गठन के समय माखनलाल सरकार ने जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग और दिनाजपुर जैसे इलाकों में गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत किया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हजारों कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़ा और भाजपा को बंगाल में जिंदा रखने के लिए लगातार काम किया।
प्रधानमंत्री मोदी का उनके सामने झुकना केवल एक वरिष्ठ कार्यकर्ता का सम्मान नहीं था, बल्कि उन लाखों अनाम कार्यकर्ताओं के संघर्ष को सलाम था जिन्होंने बिना किसी पद, प्रसिद्धि या सत्ता के वर्षों तक राष्ट्रवाद की विचारधारा को आगे बढ़ाया।
इस भावुक क्षण ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भाजपा खुद को केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाले वैचारिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करती है।
