पीएम मोदी का बड़ा गवर्नेंस रीसेट: विकसित भारत 2047 के लिए ने मंत्रियों को मिशन मोड में लगाया

पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित चार घंटे लंबी केंद्रीय मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान अपनी सरकार को एक स्पष्ट संदेश दिया — राजनीतिक मजबूती का दौर अब पीछे छूट चुका है और अब पूरा ध्यान शासन, परिणाम देने और देश के दीर्घकालिक परिवर्तन पर केंद्रित होना चाहिए।

मोदी का बड़ा गवर्नेंस रीसेट

मोदी का बड़ा गवर्नेंस रीसेट

पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित चार घंटे लंबी केंद्रीय मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान अपनी सरकार को एक स्पष्ट संदेश दिया — राजनीतिक मजबूती का दौर अब पीछे छूट चुका है और अब पूरा ध्यान शासन, परिणाम देने और देश के दीर्घकालिक परिवर्तन पर केंद्रित होना चाहिए।

कल शाम सेवा तीर्थ में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में कैबिनेट मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों और राज्य मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इसे 2026 में मोदी सरकार की पहली बड़ी आंतरिक समीक्षा बैठक माना जा रहा है। यह केवल एक सामान्य प्रशासनिक समीक्षा नहीं थी, बल्कि “विकसित भारत 2047” के महत्वाकांक्षी विजन को आगे बढ़ाने की तैयारी का संकेत भी थी।

आज सुबह एक्स पर साझा किए गए संदेश में मोदी ने बैठक को “फलदायी” बताया और कहा कि मंत्रियों के बीच “Ease of Living”, “Ease of Doing Business” और विकसित भारत के लिए जरूरी सुधारों को तेज करने पर विचार-विमर्श हुआ।

हालांकि, बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार बंद कमरे में प्रधानमंत्री का संदेश कहीं अधिक सख्त और स्पष्ट था।

सूत्रों के मुताबिक मोदी ने मंत्रियों से कहा कि सरकार अब पिछले दस वर्षों की उपलब्धियों के उत्सव में नहीं अटकी रह सकती। 2014 के बाद की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने जोर दिया कि 2026 को भविष्य के परिणामों, प्रशासनिक दक्षता और ठोस बदलाव का वर्ष बनाना होगा।

शासन का लाभ जनता तक पहुंचे, फाइलों में न अटके

बैठक का मुख्य फोकस शासन व्यवस्था को सरल बनाने और आम लोगों को सरकारी प्रक्रियाओं में होने वाली परेशानियों को कम करने पर रहा।

पीएम मोदी ने मंत्रालयों को निर्देश दिया कि फाइलों की गति तेज हो, फैसले बिना नौकरशाही की देरी के लिए जाएं और सरकारी सेवाएं अधिक जवाबदेह बनें। उन्होंने कहा कि सरकार का काम लोगों की जिंदगी में अनावश्यक दखल देना नहीं, बल्कि बेहतर और सरल व्यवस्था के जरिए उनकी जिंदगी आसान बनाना है।

सूत्रों के अनुसार मोदी ने बार-बार “Ease of Living” पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल नीतियों की घोषणा से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में कितना बदलाव महसूस हो रहा है।

मंत्रियों को निर्देश दिए गए कि कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ लोगों तक पहुंचे और नागरिकों को बिना देरी और प्रशासनिक बाधाओं के सुविधाएं मिलें। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सरकारी कामकाज में लंबित मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मंत्रालयों को तय समयसीमा में उत्पादकता बढ़ाने को कहा गया।

बैठक से निकला संदेश साफ था — मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की पहचान केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रदर्शन से तय होगी।

वैश्विक तनाव और भारत का सुधार एजेंडा

यह बैठक ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान को लेकर चिंता बढ़ रही है। अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को बाहरी आर्थिक झटकों को कम करने और व्यवसायों व उपभोक्ताओं को वैश्विक अस्थिरता से बचाने की रणनीतियों पर जानकारी दी।

बैठक में नई पीढ़ी के सुधारों, ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल को तेज करने पर भी चर्चा हुई, ताकि भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए भारत तैयार रह सके।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के साथ प्रधानमंत्री मोदी की हालिया कूटनीतिक बैठकों पर विस्तृत प्रस्तुति दी और भारत की बढ़ती रणनीतिक तथा आर्थिक साझेदारियों को रेखांकित किया।

नौ वरिष्ठ सचिवों ने अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज और पहलों पर रिपोर्ट पेश की, जबकि कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने व्यापक सुधार योजनाओं और नागरिक-केंद्रित शासन पर चर्चा की। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने भी बैठक को संबोधित किया।

महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिन मंत्रालयों का प्रदर्शन आंतरिक मूल्यांकन में कमजोर पाया गया, उन्हें जल्द सुधार करने और प्रशासनिक कमियों को दूर करने की सलाह दी गई।

राजनीतिक रूप से यह बैठक पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी के मजबूत चुनावी प्रदर्शन के बाद बढ़े आत्मविश्वास के दौर में हुई। लेकिन बैठक का संदेश यह था कि सरकार की अगली चुनौती केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि 2047 तक भारत के प्रशासनिक ढांचे को मूल रूप से बदलना है।

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