21 मई को पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक समीक्षा नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे सरकार के तीसरे कार्यकाल की दिशा तय करने वाली अहम राजनीतिक और रणनीतिक बैठक के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार आने वाले दो वर्षों के रोडमैप पर बड़ा फोकस कर सकती है।
सबसे ज्यादा चर्चा संभावित कैबिनेट फेरबदल को लेकर है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार उन मंत्रालयों की समीक्षा कर सकती है, जहां प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। कुछ नए चेहरों को मौका देने और चुनावी राज्यों के नेताओं को केंद्रीय टीम में जगह देने पर भी विचार हो सकता है। इससे 2027 और 2028 के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों की तैयारी को मजबूती देने की कोशिश दिखाई दे सकती है।
इसके अलावा, सरकार आर्थिक सुधारों को नई रफ्तार देने के लिए बड़े फैसले ले सकती है। वैश्विक आर्थिक दबाव, महंगाई और पश्चिम एशिया संकट के असर को देखते हुए रोजगार, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर विशेष फोकस रहने की संभावना है। “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” के साथ-साथ “ईज ऑफ लिविंग” को बेहतर बनाने के लिए नियमों को सरल बनाने और आम लोगों पर अनुपालन का बोझ कम करने पर जोर दिया जा सकता है।
बैठक में डिजिटल गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा संभव है। सरकार यह भी आकलन कर सकती है कि कौन सी योजनाएं जनता के बीच ज्यादा प्रभाव डाल रही हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।
राजनीतिक दृष्टि से यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्ष लगातार सरकार पर केंद्रीय टीम में नई ऊर्जा और जवाबदेही लाने का दबाव बना रहा है। ऐसे में 21 मई की बैठक से सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक संकेत भी निकल सकते हैं।
