सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पहलवान विनेश फोगाट को 30 मई को होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने Wrestling Federation of India (WFI) की उस अपील पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।
जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि विनेश ट्रायल में हिस्सा ले सकती हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले को जिस तरीके से संभाला, वह सही नहीं था।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, “हम आपको रोक नहीं रहे हैं, आप जाकर हिस्सा लीजिए। आपने देश का नाम रोशन किया है।”
हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले को पूरी तरह मातृत्व अवकाश से जोड़ दिया, जो सही तरीका नहीं था। कोर्ट ने कहा कि एशियन गेम्स चयन नीति फरवरी 2026 में बनाई गई थी और यह सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होती है।
कोर्ट ने बताया कि नियमों के अनुसार खिलाड़ियों को चार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना जरूरी था, लेकिन विनेश ने इनमें भाग नहीं लिया था।
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि संवैधानिक अदालतों को खेलों जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों में बहुत जिम्मेदारी से फैसला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालतों को इस तरह खेलों के पूरे कार्यक्रम में दखल नहीं देना चाहिए।
डोपिंग टेस्ट और मातृत्व अवकाश पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विनेश के डोपिंग टेस्ट से जुड़े मुद्दे पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि आपने अपना ब्रेक पहले से तय किया था और अगस्त 2025 के बाद वापसी की बात कही थी, लेकिन बाद में डोपिंग टेस्ट से जुड़े दो गंभीर मामलों में नियमों का पालन नहीं हुआ।
वहीं विनेश की ओर से पेश वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने कहा कि यह मामला मातृत्व से जुड़ा है। उन्होंने कोर्ट से कहा, “मैं सिर्फ ट्रायल में हिस्सा लेने का निष्पक्ष मौका मांग रही हूं। मैं अभी मां बनी हूं और किसी तरह की छूट नहीं चाहती।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल विनेश को ट्रायल में हिस्सा लेने दिया जाएगा, लेकिन हाई कोर्ट का तर्क सही नहीं माना जा सकता।
