पश्चिम बंगाल ने एक ऐसा राजनीतिक पल देखा, जिसकी कुछ साल पहले तक शायद ही किसी ने कल्पना की थी। Suvendu Adhikari ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के 15 साल लंबे शासन का अंत हो गया और पूर्वी भारत में भाजपा को अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता मिली।
कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ सरकार गठन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसे भाजपा की वैचारिक और राजनीतिक जीत के रूप में देखा गया। समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय मंत्री Amit Shah, Rajnath Singh, JP Nadda और Dharmendra Pradhan समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। इसके अलावा NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी समारोह में शामिल हुए।
चुनाव नतीजों ने बंगाल की राजनीति की तस्वीर बदल दी। भाजपा ने 207 विधानसभा सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि 15 वर्षों तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर सिमट गई। चुनाव में रिकॉर्ड मतदान भी हुआ, जहां कई चरणों में मतदान प्रतिशत 92 प्रतिशत से अधिक रहा।
सामाजिक समीकरणों पर आधारित कैबिनेट
शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट केवल बड़े चेहरों तक सीमित नहीं दिखी, बल्कि इसमें जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश साफ नजर आई।
पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष Dilip Ghosh को कैबिनेट में शामिल किया गया। उन्होंने 2014 के बाद बंगाल में भाजपा को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। RSS पृष्ठभूमि और OBC चेहरे के रूप में उनकी पहचान पार्टी के लिए अहम मानी जाती है।
Agnimitra Paul को भी मंत्री बनाया गया। उन्होंने 2026 चुनाव में भाजपा के प्रमुख महिला चेहरों में अपनी मजबूत पहचान बनाई। राजनीति में आने से पहले वह फैशन डिजाइनर थीं और कई प्रसिद्ध कलाकारों के लिए डिजाइनिंग कर चुकी हैं।
आदिवासी और क्षेत्रीय राजनीति पर फोकस
जंगलमहल क्षेत्र से आने वाले Kshudiram Tudu को मंत्री बनाकर भाजपा ने आदिवासी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया। उन्होंने अनुसूचित जनजाति सीट से बड़ी जीत दर्ज की थी।
Ashok Kirtania को शामिल कर भाजपा ने मतुआ समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया, जो उत्तर 24 परगना समेत सीमावर्ती इलाकों में काफी प्रभावशाली माना जाता है।
वहीं Nisith Pramanik की एंट्री से उत्तर बंगाल और राजबंशी समुदाय में पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश दिखाई दी। वह पहले तृणमूल कांग्रेस में थे, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल होकर बड़े नेता बने।
हालांकि कैबिनेट अभी छोटी दिख रही है, लेकिन राजनीतिक तौर पर इसका दायरा काफी बड़ा माना जा रहा है। भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि वह अब बंगाल में सिर्फ राजनीतिक जगह बनाने नहीं, बल्कि लंबे समय तक राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाने की तैयारी कर रही है।
