भाजपा नेता के PA की बीते रात गोली मार के हत्या, भाजपा नेता का बयान सोची समझी साज़िश, क्या बोली TMC ?

बीते रात में भाजपा के PA की हत्या ने बंगाल की राजनितिक गलियारों में एक अलग हलचल पैदा कर दी है, पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर खून की होली खेली गई है।

शुभेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या

बीते रात में भाजपा के PA की हत्या ने बंगाल की राजनितिक गलियारों में एक अलग हलचल पैदा कर दी है, पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर खून की होली खेली गई है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से हिंसा की खबरें आ रही थीं, लेकिन मध्यमग्राम में हुई चंद्रनाथ रथ की हत्या ने पूरे देश का ध्यान बंगाल की ओर खींच लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार 41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ की हत्या ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राज्य में एक बड़े राजनीतिक युद्ध का बिगुल फूंक दिया है।

कैसे हुई चंद्रनाथ रथ की हत्या?

मध्यमग्राम के पास हुई इस वारदात ने इलाके में दहशत फैला दी है। प्रत्यक्षदर्शियों और समाचार एजेंसियों द्वारा जारी वीडियो के अनुसार, चंद्रनाथ रथ जिस गाड़ी में सवार थे, उस पर ‘विधानसभा पास’ का स्टिकर लगा हुआ था। अपराधियों ने इस गाड़ी को निशाना बनाया और उन पर हमला किया। हमले के तुरंत बाद उन्हें लहूलुहान हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटनास्थल पर जांच करने पहुंचे राज्य के डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता ने बताया कि इस अपराध में इस्तेमाल की गई गाड़ी को पुलिस ने ज़ब्त कर लिया है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि गाड़ी पर लगी नंबर प्लेट ‘फर्जी’ पाई गई है। पुलिस को घटनास्थल से ज़िंदा कारतूस भी मिले हैं, जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे।

कौन थे चंद्रनाथ रथ? एक वायु सेना योद्धा से रणनीतिकार तक का सफर

चंद्रनाथ रथ की पहचान केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में नहीं थी। वह मूल रूप से पूर्व मेदिनीपुर जिले के चांदीपुर के निवासी थे। उनकी शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी:

भाजपा का आरोप: “15 सालों का महाजंगल राज”

शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे एक ‘सुनियोजित हत्या’ करार दिया। अधिकारी का दावा है कि हत्या से 2-3 दिन पहले इलाके की रेकी की गई थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति की तुलना ‘महाजंगल राज’ से करते हुए कहा कि राज्य में कानून का शासन खत्म हो चुका है।

बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाई है। कैबिनेट मंत्री सुकांत मजूमदार ने पीड़ित परिवार से बात की है और पुलिस पर निष्पक्ष जांच के लिए दबाव बनाया है। बीजेपी का कहना है कि टीएमसी के लोग अपनी पहचान बदलकर हिंसा कर रहे हैं ताकि विपक्ष को डराया जा सके।

टीएमसी का पलटवार: सीबीआई जांच की मांग और आत्मरक्षा

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। टीएमसी ने चंद्रनाथ रथ की हत्या की निंदा तो की, लेकिन साथ ही यह भी आरोप लगाया कि इसी चुनाव के बाद हुई हिंसा में बीजेपी कार्यकर्ताओं के हाथों उनके भी तीन कार्यकर्ता मारे गए हैं।

टीएमसी की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वे इस पूरे घटनाक्रम की ‘अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच’ की मांग करते हैं। टीएमसी का तर्क है कि लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है और वे चाहते हैं कि केंद्रीय एजेंसी इसकी जांच करे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

भवानीपुर चुनाव का संदर्भ और राजनीतिक प्रतिशोध

इस हत्या को हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगभग 15,000 वोटों से हराकर एक बड़ा उलटफेर किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रनाथ रथ, जो इस जीत के प्रमुख सूत्रधारों में से एक थे, उन्हें निशाना बनाना विपक्षी खेमे के मनोबल को तोड़ने की एक कोशिश हो सकती है।

पुलिसिया जांच और सुरक्षा पर सवाल

डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता ने आश्वासन दिया है कि चश्मदीदों के बयान और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। हालांकि, फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ी का इस्तेमाल होना यह दर्शाता है कि यह कोई तात्कालिक झगड़ा नहीं, बल्कि एक पेशेवर तरीके से अंजाम दी गई ‘हिट जॉब’ थी। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि विधानसभा पास लगी गाड़ी में सुरक्षित होने के बावजूद एक व्यक्ति की दिनदहाड़े हत्या कैसे हो गई।

बंगाल में शांति की तलाश

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा एक पुरानी और दर्दनाक परंपरा बनती जा रही है। चंद्रनाथ रथ जैसे शिक्षित और पूर्व रक्षा कर्मी की राजनीतिक हत्या यह संकेत देती है कि बंगाल की राजनीति में वैचारिक मतभेद अब व्यक्तिगत दुश्मनी और शारीरिक हमलों में तब्दील हो चुके हैं।

यदि जल्द ही दोषियों को सजा नहीं मिली और राजनीतिक दलों ने अपने कार्यकर्ताओं को संयम बरतने का निर्देश नहीं दिया, तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है। फिलहाल, पूरे मेदिनीपुर और मध्यमग्राम में शोक की लहर है और सुरक्षा बल फ्लैग मार्च कर रहे हैं ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।

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