भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार IAS अधिकारी धीमन चकमा की बहाली पर उठे सवाल, ओडिशा सरकार के फैसले पर बहस तेज

भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार और निलंबित किए गए IAS अधिकारी धीमन चकमा को ओडिशा सरकार द्वारा दोबारा सेवा में बहाल कर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में उप सचिव नियुक्त किए जाने के फैसले ने नई बहस छेड़ दी है

भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार और निलंबित किए गए IAS अधिकारी धीमन चकमा

भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार और निलंबित किए गए IAS अधिकारी धीमन चकमा

भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार और निलंबित किए गए IAS अधिकारी धीमन चकमा को ओडिशा सरकार द्वारा दोबारा सेवा में बहाल कर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में उप सचिव नियुक्त किए जाने के फैसले ने नई बहस छेड़ दी है। यह फैसला उनकी गिरफ्तारी के लगभग एक साल बाद आया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था और उनके खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया था।

सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बहाली का मतलब उन्हें क्लीन चिट देना नहीं है। उनके खिलाफ चल रही सतर्कता (विजिलेंस) जांच और विभागीय कार्रवाई अभी भी जारी है। हालांकि, गंभीर आरोपों के बीच इस तरह की नियुक्ति को लेकर लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं।

रिश्वत मांगने के आरोप के बाद हुई थी गिरफ्तारी

2021 बैच के IAS अधिकारी धीमन चकमा जून 2025 में कालाहांडी जिले के धर्मगढ़ में सब-कलेक्टर के पद पर तैनात थे। 8 जून 2025 को ओडिशा विजिलेंस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।

मामला तब शुरू हुआ जब एक स्टोन क्रशर यूनिट संचालक ने शिकायत की कि चकमा ने उससे 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी और भुगतान न करने पर प्रशासनिक कार्रवाई की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर बातचीत की रिकॉर्डिंग भी की थी।

शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने निगरानी शुरू की और जाल बिछाया। जांच एजेंसियों के अनुसार, चकमा को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया, जिसे कथित मांग की पहली किस्त बताया गया। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

घर की तलाशी में मिले 47 लाख रुपये नकद

मामला तब और गंभीर हो गया जब विजिलेंस टीम ने उनके सरकारी आवास की तलाशी ली। तलाशी के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर 47 लाख रुपये नकद मिले।

इस बरामदगी के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। जांच एजेंसियां उनकी संपत्तियों, बैंक खातों और पिछली नियुक्तियों की भी जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह मामला एक अकेली घटना थी या किसी बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क का हिस्सा।

निलंबन, जमानत और फिर बहाली

गिरफ्तारी के दो दिन बाद, 10 जून 2025 को ओडिशा सरकार ने धीमन चकमा को निलंबित कर दिया और विभागीय जांच शुरू कर दी। बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया।

24 जुलाई 2025 को ओडिशा हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी, जिसके बाद वह जेल से बाहर आ गए और मामला अदालत में चलता रहा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, लंबी अवधि तक निलंबन से जुड़े सेवा नियमों के तहत उनकी बहाली की गई है। सरकार का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है और इससे न तो विभागीय जांच प्रभावित होगी और न ही विजिलेंस अदालत में चल रहा मामला।

सोशल मीडिया पर आलोचना, जवाबदेही पर उठे सवाल

चकमा की बहाली के फैसले पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद कैसे दिया जा सकता है।

कुछ लोगों ने इसे “इनाम” जैसा कदम बताया और कहा कि इससे भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई का संदेश कमजोर पड़ता है। आलोचकों का यह भी कहना है कि वरिष्ठ नौकरशाहों के लिए जवाबदेही के मानदंड अन्य सरकारी संस्थानों की तुलना में अलग दिखाई देते हैं।

फिलहाल धीमन चकमा सरकारी सेवा में बने हुए हैं, लेकिन उनका भविष्य विभागीय जांच और अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। इस विवाद ने एक बार फिर शासन व्यवस्था, प्रशासनिक अनुशासन और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।

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