पूर्व मणिपुर DGP राजीव सिंह ने संभाला कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) का पद


मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में चुनौतीपूर्ण कार्यकाल के बाद उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में राजीव सिंह को एक बंटी हुई पुलिस फोर्स को दोबारा संगठित करने का श्रेय दिया जाता है।

मणिपुर DGP राजीव सिंह

मणिपुर DGP राजीव सिंह

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव सिंह कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) का पदभार ग्रहण कर लिया है। मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में चुनौतीपूर्ण कार्यकाल के बाद उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में राजीव सिंह को एक बंटी हुई पुलिस फोर्स को दोबारा संगठित करने का श्रेय दिया जाता है।
पिछले महीने मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी। सचिव (सुरक्षा) का पद कैबिनेट सचिवालय के तहत आता है और इसके पास स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) का प्रशासनिक नियंत्रण होता है। SPG प्रधानमंत्री और उनके आधिकारिक आवास में रहने वाले करीबी परिजनों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होती है।

1993 बैच के त्रिपुरा कैडर के आईपीएस अधिकारी राजीव सिंह ने पराग जैन का स्थान लिया है। पराग जैन, जो वर्तमान में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के प्रमुख हैं, पिछले वर्ष 12 नवंबर से इस पद का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

सीआरपीएफ में आईजी (ऑपरेशंस) के रूप में सेवा देने के बाद राजीव सिंह को 1 जून 2023 को मणिपुर भेजा गया था। इससे एक महीने पहले 3 मई को आयोजित ‘ट्राइबल सॉलिडैरिटी मार्च’ के बाद मैतेई और कुकी समुदायों के बीच व्यापक जातीय हिंसा भड़क उठी थी।
इस हिंसा में अब तक 260 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
जब राजीव सिंह ने पदभार संभाला था, तब 45,000 जवानों वाली मणिपुर पुलिस जातीय आधार पर बुरी तरह विभाजित हो चुकी थी। मैतेई समुदाय के पुलिसकर्मी इंफाल घाटी की ओर चले गए थे, जबकि कुकी समुदाय के पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंच गए थे।
करीब 1,200 पुलिसकर्मी ड्यूटी से गायब थे और पुलिस की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठ रहे थे। इस चुनौती से निपटने के लिए राजीव सिंह ने कई असामान्य प्रशासनिक कदम उठाए। उन्होंने 1,150 से अधिक लापता पुलिसकर्मियों का पता लगाकर उन्हें दोबारा सेवा में शामिल कराया और उन्हें उन स्थानों पर रिपोर्ट करने की अनुमति दी, जहां वे स्वयं को सुरक्षित महसूस करते थे।
एक अनूठी पहल के तहत उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 304 नए भर्ती कांस्टेबलों की संयुक्त पासिंग आउट परेड आयोजित करवाई। दोनों समुदायों के जवानों ने अलग-अलग स्थानों से शपथ ली और बाद में उन्हें उनके सुरक्षित क्षेत्रों में तैनात किया गया।

राजीव सिंह ने पुलिस शस्त्रागारों की लूट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की, संवेदनशील चौकियों को मजबूत किया, सीमा पार सक्रिय उग्रवादी ठिकानों को ध्वस्त कराया और संवेदनशील क्षेत्रों में खेती कर रहे किसानों को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई।
मणिपुर में अपने कार्यकाल के दौरान गहरी सामुदायिक खाई के बावजूद राजीव सिंह को विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूहों से सराहना मिली।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के उत्तराधिकारी मुख्यमंत्री खेमचंद युमनाम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्होंने पूर्व डीजीपी राजीव सिंह को विदाई दी और राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा शांति और स्थिरता को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की।
उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने भी कठिन परिस्थितियों में उनके निष्पक्ष और संतुलित प्रशासन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सामुदायिक तनाव के बीच भी राजीव सिंह ने पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखी।

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