ऊर्जा परिवर्तन में दुनिया की रफ्तार धीमी, भारत ने फिर भी दर्ज की बड़ी छलांग

ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum-WEF) की एनर्जी ट्रांजिशन इंडेक्स (ETI) 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस साल दुनिया के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल रहा है।

ऊर्जा परिवर्तन में दुनिया की रफ्तार धीमी

ऊर्जा परिवर्तन में दुनिया की रफ्तार धीमी

भारत स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum-WEF) की एनर्जी ट्रांजिशन इंडेक्स (ETI) 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस साल दुनिया के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दो स्थान ऊपर चढ़कर 70वें स्थान पर पहुंच गया है। WEF ने भारत को ऊर्जा परिवर्तन के अगले चरण का प्रमुख खिलाड़ी बताया है और कहा है कि आने वाले समय में वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ा फोकस

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ETI स्कोर इस साल 1.9 प्रतिशत बढ़ा है। इसका सबसे बड़ा कारण नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का विस्तार, बिजली ग्रिड को मजबूत करना और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा देना है।

इन प्रयासों से भारत में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है और लोगों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने में भी मदद मिली है।

स्वच्छ ऊर्जा से बढ़े रोजगार

WEF ने कहा कि भारत की प्रगति सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर रोजगार पर भी दिख रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में कम-कार्बन (Low Carbon) क्षेत्रों में रोजगार 24 प्रतिशत बढ़ा है वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वालों की संख्या बढ़कर 13 लाख (1.3 मिलियन) हो गई है, जो 2023 की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है।

इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा रोजगार जलविद्युत (Hydropower) परियोजनाओं से मिला है। इसके साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में भी तेजी से काम हो रहा है।

दुनिया में निवेश बढ़ा, लेकिन प्रगति धीमी

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में ऊर्जा क्षेत्र में रिकॉर्ड 3.3 ट्रिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जिसमें 2.3 ट्रिलियन डॉलर स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर खर्च किए गए।

इसके बावजूद कई देशों में ऊर्जा सुरक्षा कमजोर हुई है और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में प्रगति उम्मीद से धीमी रही है।

WEF के अनुसार, इसका कारण भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती ऊर्जा मांग और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे क्षेत्रों में अस्थिरता है।

कई देशों की तैयारी कमजोर

रिपोर्ट बताती है कि इस साल 56 प्रतिशत देशों ने अपने ऊर्जा परिवर्तन स्कोर में सुधार किया, लेकिन केवल 24 प्रतिशत देश ही ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और समान पहुंच जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में एक साथ सुधार कर पाए।

इसके अलावा, स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जरूरी निवेश अब भी कुछ चुनिंदा देशों तक ही सीमित है। विकासशील देशों को वित्त जुटाने में विकसित देशों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक लागत उठानी पड़ रही है।

AI और बढ़ती बिजली की मांग बनी चुनौती

WEF ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहनों और बढ़ते डिजिटलीकरण के कारण दुनिया में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल वैश्विक बिजली की मांग 3 प्रतिशत बढ़ी, जिसमें लगभग 80 प्रतिशत वृद्धि उभरती अर्थव्यवस्थाओं से आई।

हालांकि, कई विकासशील देशों के पास पर्याप्त निवेश और मजबूत बिजली ढांचा नहीं है, जिससे उनके लिए ऊर्जा परिवर्तन की रफ्तार बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

भारत बना उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मिसाल

रैंकिंग में स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क पहले तीन स्थानों पर रहे। वहीं, जी-20 देशों में जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, ब्राजील और अमेरिका भी शीर्ष देशों में शामिल रहे।

लेकिन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत का प्रदर्शन सबसे अलग रहा। जहां कई देश ऊर्जा सुरक्षा और निवेश की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं भारत लगातार बुनियादी ढांचे, स्वच्छ ऊर्जा और सस्ती बिजली पर निवेश बढ़ाकर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

आगे के लिए WEF की सलाह

WEF ने कहा कि भविष्य में ऊर्जा परिवर्तन की रफ्तार बनाए रखने के लिए तीन बातों पर सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा—

रिपोर्ट के अनुसार, जब दुनिया के कई देश ऊर्जा परिवर्तन की रफ्तार बनाए रखने में संघर्ष कर रहे हैं, तब भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। WEF का मानना है कि भारत अब केवल इस बदलाव का हिस्सा नहीं है, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा की दिशा तय करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो रहा है।

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