उत्तर प्रदेश के अयोध्या के रहने वाले भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान उनके माता-पिता नीता तिवारी और जंग बहादुर तिवारी को प्रदान किया। समारोह के दौरान जब शशांक तिवारी के नाम की घोषणा हुई, तो उनके माता-पिता मंच की ओर बढ़े, लेकिन बेटे की याद में भावुक होकर आगे नहीं बढ़ सके। उनकी मां की आंखों से आंसू बहने लगे। यह देखकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं उनके पास पहुंचीं, उन्हें कीर्ति चक्र सौंपा और सांत्वना दी। इस भावुक पल पर राष्ट्रपति भवन का पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
अयोध्या के बेटे ने कम उम्र में हासिल की बड़ी पहचान
लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी का जन्म 24 जनवरी 2002 को अयोध्या में हुआ था। उन्होंने वर्ष 2019 में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की प्रवेश परीक्षा पास की और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 14 दिसंबर 2024 को भारतीय सेना की आर्मी सर्विस कोर में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। बाद में उन्हें 1 सिक्किम स्काउट्स में तैनात किया गया, जहां वे सिक्किम के ऊंचाई वाले कठिन इलाकों में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
साथी सैनिक की जान बचाने के लिए नदी में लगा दी छलांग
22 मई 2025 को सिक्किम में एक अभियान के दौरान शशांक तिवारी अपने साथियों के साथ एक पहाड़ी नदी पार कर रहे थे। इसी दौरान अग्निवीर स्टीफन सुब्बा का पैर फिसल गया और वह तेज बहाव वाली नदी में गिर गए। अपने साथी की जान बचाने के लिए लेफ्टिनेंट शशांक ने बिना अपनी सुरक्षा की परवाह किए तुरंत नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए अग्निवीर को सुरक्षित किनारे की ओर धकेल दिया और उसकी जान बचा ली।
अगले दिन मिला शव, देश ने दी वीर सपूत को श्रद्धांजलि
साथी सैनिक को बचाने के बाद शशांक तिवारी खुद नदी की तेज धारा में फंस गए और बह गए। घटना की जानकारी मिलते ही सेना ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। अगले दिन, 23 मई 2025 को उनका शव घटना स्थल से करीब 800 मीटर दूर बरामद हुआ। उनकी शहादत की खबर से पूरे अयोध्या में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और देश ने इस वीर सपूत को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
