1. मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत ने अपनाई रणनीतिक तैयारी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल-गैस आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। दुनिया के कई देश संभावित आपूर्ति संकट और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका से जूझ रहे हैं, लेकिन भारत ने वैकल्पिक स्रोतों पर भरोसा बढ़ाकर अपनी रणनीति को प्रभावी साबित किया है। इसे मोदी सरकार के “प्लान-बी” के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश की ऊर्जा जरूरतों को प्रभावित होने से बचाना है।
2. मई में रूस से तेल आयात में 21% की बढ़ोतरी
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में लगभग 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके चलते भारत के कुल कच्चे तेल आयात में महीने-दर-महीने करीब 8 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रूसी तेल की खरीद को प्राथमिकता दी और अपनी ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने का प्रयास किया।
3. दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना भारत
रिपोर्ट के मुताबिक, मई महीने में भी भारत रूस से तेल खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बना रहा। रूस से मिलने वाला अपेक्षाकृत सस्ता कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रहा है। इससे न केवल आयात लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, बल्कि घरेलू बाजार में ईंधन आपूर्ति को भी स्थिर बनाए रखने में सहायता मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बहु-स्रोत नीति पर काम कर रहा है।
4. ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से बढ़ते तेल आयात का उद्देश्य किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और वैश्विक संकटों के प्रभाव को सीमित करना है। यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे। रूस से लगातार बढ़ती खरीद इस बात का संकेत है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए आयात नीति को आगे बढ़ा रहा है।
