बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली 19 वर्षीय सुजाता कुमारी की कथित ऑनर किलिंग का मामला अब सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं रह गया है। यह घटना इस बात पर भी सवाल खड़े कर रही है कि जब कोई बालिग लड़की अपनी मर्जी से शादी कर सकती है, तो क्या कानून उसे बाद में भी सुरक्षा दे पाता है?
पुलिस के अनुसार, 8 मई को सुजाता की कथित तौर पर उसके ही परिवार के लोगों ने गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए उसके शव को बूढ़ी गंडक नदी के किनारे ले जाकर जला दिया गया।
यह मामला तब चर्चा में आया, जब सुजाता के पति गौरिशंकर कुमार ने सोशल मीडिया पर भावुक वीडियो पोस्ट कर मदद की गुहार लगाई। उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की और कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेंगे।
इन वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
स्कूल से शुरू हुई दोस्ती, जाति बनी शादी में सबसे बड़ी रुकावट
सुझाता और गौरिशंकर एक-दूसरे को स्कूल के दिनों से जानते थे। दोनों के बीच साल 2020 के आसपास प्रेम संबंध शुरू हुआ।
लेकिन दोनों अलग-अलग जातियों से थे, इसलिए सुजाता के परिवार ने इस रिश्ते का लगातार विरोध किया।
आखिरकार 18 जनवरी 2026 को दोनों घर से भाग गए और समस्तीपुर में शादी कर ली। शादी के बाद दोनों हरियाणा के सोनीपत में रहने लगे।
कोर्ट में कहा था- अपनी मर्जी से की है शादी
शादी के बाद सुजाता के परिवार ने गौरिशंकर के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया।
पुलिस ने दोनों को ढूंढकर 11 और 12 फरवरी को अदालत में पेश किया। अदालत में सुजाता ने साफ कहा कि वह बालिग है, उसने अपनी इच्छा से शादी की है और वह अपने पति के साथ रहना चाहती है।
इसके बावजूद बाद की कानूनी प्रक्रिया और परिस्थितियों के कारण दोनों अलग हो गए। होली के समय सुजाता अपने मायके लौट आई। जांच एजेंसियों का मानना है कि यहीं से घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।
अचानक लापता हुई सुजाता
गौरिशंकर का कहना है कि उनकी सुजाता से आखिरी बार 31 मार्च को बात हुई थी। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया और उससे कोई संपर्क नहीं हो सका।
उन्होंने कई बार पुलिस से मदद मांगी, लेकिन शुरुआत में कोई खास कार्रवाई नहीं हुई।
बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किए और आशंका जताई कि सुजाता की हत्या कर दी गई है। उन्होंने न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या करने की चेतावनी भी दी।
इन वीडियो के वायरल होने के बाद मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया और पुलिस ने एसआईटी गठित कर जांच शुरू की।
भाई की गिरफ्तारी के बाद जांच में आया नया मोड़
गौरिशंकर की शिकायत के आधार पर पुलिस ने सुजाता के परिवार के लोगों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान उसके भाई अभिषेक कुमार को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस का दावा है कि पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि परिवार अंतरजातीय विवाह के खिलाफ था और उन्हें डर था कि सुजाता दोबारा अपने पति के पास चली जाएगी।
जांच के अनुसार, इसी वजह से परिवार के कुछ लोगों ने मिलकर 8 मई को उसकी हत्या कर दी।
पुलिस का आरोप है कि हत्या के बाद शव को बूढ़ी गंडक नदी के किनारे ले जाकर जला दिया गया, ताकि सबूत नष्ट हो जाएं।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कई नमूने जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि इस मामले में पांच से अधिक लोगों की भूमिका सामने आई है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
अदालत की मंजूरी के बाद भी क्यों नहीं मिली सुरक्षा?
यह मामला एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है।
सुझाता ने अदालत में साफ कहा था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है। कानून ने उसके फैसले को स्वीकार भी किया, लेकिन जब वह अपने घर लौटी, तब उसकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकी।
यह घटना दिखाती है कि अंतरजातीय विवाह के मामलों में अदालत में सहमति दर्ज होने के बाद भी कई बार सामाजिक दबाव और पारिवारिक विरोध खत्म नहीं होता।
कानून और सुरक्षा के बीच की दूरी
मुजफ्फरपुर का यह मामला कई अहम सवाल छोड़ता है।
क्या केवल अदालत में दिया गया बयान किसी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए पर्याप्त है?
अगर किसी को पहले से खतरे की आशंका हो, तो उसे सुरक्षा कौन देगा?
और किसी के लापता होने के मामलों में प्रशासन तभी सक्रिय क्यों होता है, जब मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो जाए?
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। अदालत में अभी इस मामले की सुनवाई होनी बाकी है, लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया है कि कई बार कानून अधिकार तो देता है, लेकिन उन अधिकारों की सुरक्षा व्यवहारिक रूप से सुनिश्चित करना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
