पंजाब सीएम भगवंत मान की बढ़ीं मुश्किलें: वायरल वीडियो मामले में अकाल तख्त ने सुनाया फैसला

पंजाब सीएम भगवंत मान एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें गुरु का दोषी और पंथ विरोधी करार दिया है।

अकाल तख्त की मर्यादा पर सख्त संदेश

अकाल तख्त की मर्यादा पर सख्त संदेश

पंजाब सीएम भगवंत मान एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें गुरु का दोषी और पंथ विरोधी करार दिया है। पांच सिंह साहिबानों की बैठक के बाद यह फैसला सुनाया गया। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने सिख संगत से मुख्यमंत्री भगवंत मान का बहिष्कार करने की अपील की है।

जत्थेदार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होकर दावा किया था कि वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किया गया है। हालांकि, अकाल तख्त का कहना है कि जांच में यह दावा सही नहीं पाया गया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अकाल तख्त साहिब के सामने आकर झूठ बोल सकता है, उससे सिख पंथ के हित में निर्णय लेने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

दो फोरेंसिक जांचों का दावा, वीडियो को बताया गया असली

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने दावा किया कि वायरल वीडियो की दो अलग-अलग फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में जांच कराई गई। उनके अनुसार, दोनों जांचों में वीडियो को वास्तविक पाया गया और उसमें किसी प्रकार की एडिटिंग या एआई तकनीक से छेड़छाड़ के प्रमाण नहीं मिले।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं वीडियो की फोरेंसिक जांच के लिए तैयार होने की बात कही थी, जिसके बाद जनवरी में अकाल तख्त सचिवालय की ओर से उन्हें पत्र भेजा गया था। लेकिन कथित तौर पर उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। इस मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार बिल पर भी घिरी सरकार, पूरी कैबिनेट को किया गया तलब

बैठक में पंजाब सरकार द्वारा लाए गए “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन बिल” पर भी सवाल उठाए गए। अकाल तख्त का कहना है कि इस कानून को तैयार करते समय सिख विद्वानों, धार्मिक संस्थाओं और पंथक संगठनों से पर्याप्त विमर्श नहीं किया गया।

इसी कारण बिल पर हस्ताक्षर करने वाले सभी सिख विधायकों और पंजाब मंत्रिमंडल को 29 जून को अकाल तख्त साहिब में उपस्थित होने के लिए समन जारी किया गया है। अकाल तख्त का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक विषय पर व्यापक परामर्श के बिना कानून बनाना उचित नहीं था।

अब इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार विपक्ष तथा धार्मिक संस्थाओं के निशाने पर हैं, वहीं दूसरी ओर सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और मुख्यमंत्री इन आरोपों तथा अकाल तख्त के फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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