राम मंदिर चंदा विवाद पर तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- नियमित प्रक्रिया से होगी सुनवाई

राम मंदिर में श्रद्धालुओं से मिले चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है।

राम मंदिर दान जांच

राम मंदिर दान जांच

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं से मिले चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि इस मामले में आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने के बाद याचिका को नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। फिलहाल अदालत ने मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

तत्काल सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

यह मामला न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष आया। याचिकाकर्ता ने राम मंदिर में मिले चंदे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं और राज्य सरकार जिस प्रकार इस मामले को संभाल रही है, उससे निष्पक्ष जांच को लेकर संदेह पैदा होता है। इस पर न्यायमूर्ति सुंदरश ने पूछा, “इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्या है?” इसके बाद पीठ ने कहा कि अदालत दोबारा खुलने के बाद इस याचिका को सूचीबद्ध किया जाएगा।

क्या है पूरा राम मंदिर चंदा विवाद?

याचिका में आरोप लगाया गया है कि अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यों और मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे के उपयोग में कथित वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के उपयोग की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि दानदाताओं का विश्वास कायम रहे।

हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि अब तक इन आरोपों की किसी अदालत ने पुष्टि नहीं की है और न ही किसी न्यायिक जांच में इन्हें सही ठहराया गया है।

याचिका में क्या-क्या मांग की गई है?

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्देश देने की मांग की है कि—

याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।

क्या पहले से चल रही है जांच?

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एक एसआईटी का गठन किया था। इस जांच दल में—

को शामिल किया गया है।

यह एसआईटी मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही है।

एसआईटी पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने बिना एफआईआर दर्ज किए जांच शुरू कर दी है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं और ऐसे संवेदनशील मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।

सीबीआई जांच की मांग क्यों?

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मामला बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन और संभावित आपराधिक पहलुओं से जुड़ा है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की एसआईटी के बजाय सीबीआई के नेतृत्व में बहु-विषयक जांच दल गठित किया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच होने से तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल होगी और जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का रुख क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक आरोपों की सत्यता या जांच की मांग पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। अदालत ने केवल तत्काल सुनवाई की मांग को स्वीकार करने से इनकार किया है और कहा है कि मामला अदालत के पुनः खुलने के बाद नियमित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा।

अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट होगा कि सुप्रीम कोर्ट सीबीआई जांच की मांग, राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की भूमिका और मामले की आगे की सुनवाई पर क्या रुख अपनाता है।

Exit mobile version