रुद्रम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा ताकत बढ़ी, दुश्मन के रडार सिस्टम को 300 किमी दूर से कर सकती है तबाह

रुद्रम-2 करीब 5 मीटर लंबी और एक टन से अधिक वजन वाली भारी मिसाइल है। फिलहाल इसे मुख्य रूप से Su-30MKI विमान से इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया है।

रुद्रम-2 मिसाइल

रुद्रम-2 मिसाइल

भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रुद्रम-2 एंटी-रेडिएशन मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण में मिसाइल को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लड़ाकू विमान से छोड़ा गया और उसने अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना साधते हुए सीधा प्रहार किया।

डीआरडीओ के अनुसार, रुद्रम-2 को सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमान से लॉन्च किया गया। मिसाइल ने तय लक्ष्य को पूरी सटीकता के साथ भेद दिया और परीक्षण के सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इससे साबित हुआ कि यह मिसाइल अब जल्द ही भारतीय वायुसेना में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

क्या है रुद्रम-2 की खासियत?

रुद्रम-2 करीब 5 मीटर लंबी और एक टन से अधिक वजन वाली भारी मिसाइल है। फिलहाल इसे मुख्य रूप से Su-30MKI विमान से इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया है।

यह एक एंटी-रेडिएशन मिसाइल है, जिसका मुख्य काम दुश्मन के रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, संचार नेटवर्क और निगरानी उपकरणों को नष्ट करना है। रुद्रम-1 के मुकाबले रुद्रम-2 में ज्यादा रेंज और बेहतर लक्ष्य भेदन क्षमता दी गई है।

इसकी मारक क्षमता लगभग 300 किलोमीटर तक मानी जा रही है। यानी भारतीय वायुसेना के पायलट दुश्मन के रडार सिस्टम को सुरक्षित दूरी से ही निशाना बना सकते हैं।

मिसाइल में आधुनिक नेविगेशन और टारगेटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसकी खास बात यह है कि अगर दुश्मन का रडार ऑपरेटर मिसाइल का खतरा देखकर रडार बंद भी कर दे, तब भी रुद्रम-2 लक्ष्य का पीछा करके उसे नष्ट कर सकती है।

केवल रडार ही नहीं, बंकर भी कर सकती है तबाह

रुद्रम-2 सिर्फ एंटी-रेडिएशन मिसाइल ही नहीं है, बल्कि इसे एक सटीक एयर-टू-ग्राउंड हथियार के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर यह दुश्मन के बंकर, एयरस्ट्रिप और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भी निशाना बना सकती है।

दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को कमजोर करने में अहम

इस तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल SEAD (Suppression of Enemy Air Defences) मिशन में किया जाता है। इनका काम दुश्मन के रडार से निकलने वाले रेडियो सिग्नल को पकड़ना और उसी के आधार पर लक्ष्य को नष्ट करना होता है।

जब दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट हो जाते हैं, तब लड़ाकू विमान बिना ज्यादा खतरे के दुश्मन के इलाके में अंदर तक जाकर ऑपरेशन कर सकते हैं।

हाइपरसोनिक गति से हमला

रुद्रम-2 की एक और बड़ी विशेषता इसकी तेज रफ्तार है। माना जाता है कि यह मिसाइल मैक-5 (ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक) से भी ज्यादा गति हासिल कर सकती है। इतनी तेज रफ्तार के कारण दुश्मन के लिए इससे बचना बेहद मुश्किल हो जाता है।

रुद्रम-3 और रुद्रम-4 पर भी काम जारी

डीआरडीओ रुद्रम मिसाइल परिवार के अगले संस्करणों पर भी तेजी से काम कर रहा है। रुद्रम-3 की मारक क्षमता करीब 500 किलोमीटर तक हो सकती है और इसमें बड़ा वारहेड लगाया जाएगा। इसके शुरुआती परीक्षण पूरे हो चुके हैं और जल्द ही फायरिंग ट्रायल होने की उम्मीद है।

पूरी तरह स्वदेशी है रुद्रम कार्यक्रम

रुद्रम परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है। मिसाइल से लेकर उसके लॉन्च सिस्टम तक सभी तकनीकें स्वदेशी हैं। इससे भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

भविष्य में रुद्रम-2 को Su-30MKI के अलावा मिराज-2000 और राफेल लड़ाकू विमानों के साथ भी जोड़े जाने की संभावना है।

रुद्रम-2 का सफल परीक्षण केवल एक मिसाइल की सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत की उस क्षमता का प्रमाण है, जिससे वह भविष्य में दुश्मन के एयर डिफेंस नेटवर्क को प्रभावी ढंग से नष्ट कर सकेगा

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