महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने आज अपने सभी सांसदों की दिल्ली में एक अहम बैठक बुलाई है। पार्टी के भीतर एक और बड़ी टूट की अटकलों के बीच यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद मुख्यमंत्री नहीं बल्कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि बागी सांसदों का एक गुट पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों का समर्थन होने का दावा कर रहा है।
लोकसभा स्पीकर से संपर्क की खबर
सूत्रों के अनुसार, बागी गुट ने अपनी ताकत दिखाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी संपर्क किया है। इस खबर के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ गई है।
हालांकि, अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही उद्धव ठाकरे गुट या लोकसभा सचिवालय की ओर से इस पर कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है।
सभी सांसदों को दिल्ली बुलाया गया
संभावित बगावत को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने सभी नौ लोकसभा सांसदों को दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया है। पार्टी ने इस बैठक के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ भी जारी किया है।
थ्री-लाइन व्हिप का मतलब होता है कि सभी सांसदों की बैठक में मौजूदगी अनिवार्य है। बिना उचित कारण अनुपस्थित रहने पर पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर सकती है।
2022 जैसी स्थिति से बचने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उद्धव ठाकरे 2022 जैसी स्थिति दोबारा नहीं होने देना चाहते। वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी और उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी।
अब फिर से पार्टी में टूट की चर्चाओं ने उद्धव गुट की चिंता बढ़ा दी है। इसलिए नेतृत्व सभी सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा हुआ है।
बैठक पर टिकी सबकी नजर
आज होने वाली बैठक के बाद यह साफ हो सकेगा कि पार्टी के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ हैं या फिर बागी गुट के दावे सही साबित होते हैं। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम पर सभी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।
अगर सांसदों का बड़ा समूह वास्तव में एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होता है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। वहीं, अगर सभी सांसद बैठक में शामिल होते हैं, तो इससे पार्टी की एकजुटता का संदेश जाएगा।
