विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के स्टील मेल्ट शॉप-1 में हुए भीषण विस्फोट में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 6 अन्य घायल हो गए। इनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसा उस समय हुआ जब करीब 1,500 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले पिघले हुए स्टील को एक बर्तन (लैडल) से दूसरे हिस्से (टंडिश) में डाला जा रहा था। इसी दौरान अचानक तेज धमाका हुआ और आग का बड़ा गोला निकलने से आसपास काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
हादसे की जांच शुरू, विशेषज्ञों की टीम करेगी कारणों की पड़ताल
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि विस्फोट पिघले हुए स्टील में अशुद्धियों या तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ हो सकता है। हालांकि अधिकारियों ने संचालन में किसी तरह की लापरवाही की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई है, जो अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।
कर्मचारियों ने लगाए स्टाफ की कमी और सुरक्षा में लापरवाही के आरोप
मजदूर संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में हजारों स्थायी और ठेका कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई, लेकिन उनकी जगह नए लोगों की नियुक्ति नहीं हुई। उनका आरोप है कि खराब गुणवत्ता वाले कच्चे माल और पुराने उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उत्पादन बढ़ाने का दबाव तो है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और पर्याप्त स्टाफ की कमी के कारण हादसों का खतरा बढ़ गया है।
मुआवजे का ऐलान, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के बाद सरकार ने मृतक कर्मचारियों के परिवारों के लिए मुआवजे और आश्रितों को नौकरी देने की घोषणा की है। स्थायी कर्मचारियों के परिवारों को करीब 1.72 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है, जबकि ठेका कर्मचारियों के लिए अलग सहायता पैकेज घोषित किया गया है। इसके बावजूद कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की संख्या और उपकरणों की गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं।
