भारतीय वायुसेना की तरफ से साफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन को एक Request for Proposal (RFP) भेजा गया है। इस RFP का पहला पैराग्राफ ही पाकिस्तान और भारत में मौजूद उसके इकोसिस्टम के झूठ की पोल खोलने को काफी है। क्यों ये RFP ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल को लेकर किए गए क्लेम के बारे में काफी कुछ साफ़ कर देती है।RFP के पहले पैराग्राफ को ध्यान से देखें तो पता चलता है कि भारतीय वायुसेना इसमें अपने 36 राफेल लड़ाकू विमानों के बारे में बात कर रही है और इन विमानों के लिए मेंटेनेंस सपोर्ट की ज़रूरत का जिक्र किया गया है। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये पूरी रिक्वायरमेंट सभी 36 विमानों को लेकर दी जा रही है।
इस पहले पैराग्राफ में यह भी लिखा गया है कि सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच एक Inter-Governmental Agreement (IGA) हुआ था। 23 सितंबर 2016 को हुए इस समझौते के तहत भारतीय वायुसेना को 36 राफेल फाइटर जेट्स की आपूर्ति की गई थी। इसके साथ ही इन विमानों के लिए Performance Based Logistics (PBL) मॉडल के अंतर्गत पांच वर्षों तक Consumable Spares की आपूर्ति भी सुनिश्चित की गई थी।
जानकारी के लिए बता दें कि भारत ने 2016 में फ्रांस के साथ हुई गर्वनमेंट-टू -गवर्नमेंट डील के तहत अर्जेंट बेसिस पर बने-बनाए (ऑफ द शेल्फ) 36 राफेल विमानों की ख़रीद की थी, और साल 2020 से ये विमान भारत को मिलने शुरू हुए थे। तब से ही ये विमान फ़िलहाल इंडियन एयर फोर्स के सबसे एडवांस और फ़्रंट वॉरियर्स बने हुए हैं।लेकिन पाकिस्तान की तरफ़ से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के चार राफेल लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया गया था। यही नहीं पाकिस्तान के DG ISPR और प्रोपेगेंडा मीडिया द्वारा इन विमानों के कथित टेल नंबर भी सार्वजनिक किए गए थे।पाकिस्तान के DG ISPR की तरफ़ से बकायदा आधिकारिक रूप से IAF के RB001, RB021, RB022 और RB027 टेल नंबर वाले राफेल मार गिराने का दावा किया गया था।
आज भी पाकिस्तानी फौज और मीडिया इन दावों को न सिर्फ दोहराती रहती है, बल्कि जबरदस्त नुक़सान झेलने और क़रीब एक दर्जन से ज्यादा एयरक्राफ्ट गंवाने के बावजूद राफेल गिराने के इन दावों को अपनी जीत का आधार बताती है।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर के फील्ड मार्शल बनने से लेकर पाकिस्तान की पूरी की पूरी “विजेता थ्योरी” काफी हद तक इन्हीं दावों पर आधारित रही है- जिनका मूल था IAF के राफेल मार गिराना।पाकिस्तान तो पाकिस्तान- यहां हैरानी की बात ये थी कि भारत में मौजूद एक बड़ा वर्ग भी पाकिस्तान के इस प्रोपेगेंडा में फँस कर सेना से लगातार “कितने राफाल गिरे” का सवाल पूछता रहा। यहां तक कि ये मुद्दा बकायदा संसद में भी उठाया गया और इस पर रक्षा मंत्री को जवाब भी देना पड़ा।
लेकिन IAF ने क़रीब एक साल बाद बड़े ही प्रोफेशनल ढंग से इन सवालों का न सिर्फ अपने ही अंदाज़ में जवाब दिया है, बल्कि पाकिस्तान के साथ साथ देश के भीतर चल रहे पूरे प्रोपेगेंडा सिस्टम की धज्जियां उड़ा कर भी रख दी है।
इस नए RFP के माध्यम से भारतीय वायुसेना ने स्पष्ट रूप से 36 राफेल विमानों के लिए आगे की Performance Based Logistics अरेंजमेंट्स की तैयारी शुरू कर दी है। यानी फ़िलहाल आधिकारिक दस्तावेजों में भी राफेल की वही संख्या मौजूद है जो 2016 में डील के समय थी।
अब अगर पूरे के पूरे 36 राफेल आज भी सेवा में हैं, तो इससे पाकिस्तानी दावों की विश्वसनीयता वैसे ही खत्म हो जाती है।ज़ाहिर है ये दस्तावेज पाकिस्तान के उन दावों को पूरी तरह ख़ारिज कर देता है, जिनके आधार पर उसने राफेल विमानों को मार गिराने की थ्योरी गढ़ी थी।
उम्मीद है कि अब इस RFP के बाद कम से कम देश के भीतर “कितने राफेल गिरे” वाली बहस का समापन हो जाएगा।
वैसे यहां एक बात जो समझनी चाहिए वो ये है कि इस तरह के किसी भी युद्ध में एयरक्राफ्ट या हार्डवेयर लॉस काफी स्वाभाविक हैं ऐसे में युद्ध का मूल्यांकन हार्डवेयर लॉस से नहीं बल्कि आपके तय किए गए और पूरे किए गए ‘ऑब्जेक्टिव्स’ के आधार पर किया जाता है। और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने जितने भी ऑब्जेक्टिव्स तय किए थे, वो सभी अचीव किए गए, फिर चाहे वो शुरुआत में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करना रहा हो या फिर बाद में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर सटीक पलटवार कर उसे घुटनों पर लाने का रहा हो।
पूरे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना ने सिर्फ आतंकी ठिकानों को ही निशाना नहीं बनाया, स्केल बढ़ने के बाद पाकिस्तान के 7 एयरबेसेस, एयरक्राफ्ट हैंगर्स, रडार साइट्स और कमांड कंट्रोल साइट्स को भी निशाना बनाया गया, वो भी पिन प्वाइंट एक्यूरेसी के साथ। शायद इन हमलों का ही असर था कि पाकिस्तान की तरफ़ से तीन दिनों के अंदर ही सीज़फायर की रिक्वेस्ट आ गई। और टेक्निकली इन ऑब्जेक्टिव्स को ही इस ऑपरेशन की सफलता का पैमाना माना जाना चाहिए। नुकसान की चर्चा विश्लेषण का विषय ज़रूर हो सकती हैं, लेकिन इनसे रिजल्ट तय नहीं होता।
ईरान-अमेरिका के बीच हुए हालिया युद्ध में भी इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जहां अमेरिका ने अपने कई एडवांस एयरक्राफ्ट खोए हैं (ईरान के पास स्तरीय एयरडिफेंस न होने के बावजूद) फिर भी अमेरिका ने अपने इस ऑपरेशन को अपनी जीत के तौर पर ही पेश किया है।
हालांकि जब बात पाकिस्तान की होती है तो अक्सर चर्चा तथ्यों पर नहीं प्रोपेगेंडा और DGISPR के झूठे दावों पर आधारित होती है। और उसके ये दावे बार-बार झूठे साबित हुए हैं।
पहले भी पाकिस्तान ने जिन चार विमानों को मार गिराने का दावा किया था, उनमें से दो RB021 और RB022 टेल नंबर वाले राफेल विमान 26 जनवरी 2026 को IAF के ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ में उड़ते हुए पहले ही देखे जा चुके हैं। हमने तब भी उस वीडियो के ज़रिए ये बताने की कोशिश की थी कि आख़िर क्यों पाकिस्तान के राफेल को लेकर किए गए ये दावे झूठ से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
अब IAF ने अपनी RFP के ज़रिए एक बार फिर पाकिस्तान के इस प्रोपेगेंडा को एक बार फिर से बेनक़ाब कर दिया है। वैसे तो भारत की मिलिट्री लीडरशिप कभी भी पाकिस्तान के इस प्रोपेगेंडा वॉर को बहुत गंभीरता से नहीं लेती है, लेकिन अब शायद ज़रूरत है कि इस फ़्रंट पर भी ध्यान दिया जाए।
नहीं तो देश के अंदर भी “कितने राफेल गिरे” पूछने वालों की कमी नहीं है।
