मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित विवादित भोजशाला परिसर के पास शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा। मुस्लिम पक्ष ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।
इस मामले में 24 जुलाई को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी थी। हालांकि, उस दिन अदालत की कार्यवाही समय से पहले समाप्त होने के कारण मामले की सुनवाई नहीं हो सकी थी। अब इस याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी।
सुनवाई से पहले वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी, जो मुस्लिम पक्ष की ओर से अदालत में पेश हुए, ने इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना था कि जिला प्रशासन ने जिस वैकल्पिक स्थल की पहचान की है, वह भोजशाला परिसर से करीब 1.3 किलोमीटर दूर है और जिला कलेक्टर ने आदेश जारी कर कहा है कि नमाज के लिए केवल इसी स्थान का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अहमदी ने अदालत से कहा कि इतनी दूर स्थित स्थान उचित नहीं है और यह पहले दिए गए निर्देशों की भावना के अनुरूप भी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि भोजशाला परिसर के पास एक दरगाह है और उसके सामने खाली जमीन मौजूद है। उनके अनुसार, यदि उसी स्थान को नमाज के लिए उपलब्ध कराया जाए तो यह ज्यादा सुविधाजनक और उपयुक्त रहेगा।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि वैकल्पिक स्थल का पूरा विवरण मुस्लिम पक्ष को क्यों नहीं दिया गया। इस पर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि प्रशासन ने एक अन्य स्थान की भी पहचान कर ली है और दोनों पक्षों के बीच इस संबंध में बातचीत हुई है।
हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने नए प्रस्तावित स्थान पर भी आपत्ति जताई और कहा कि वह भी उपयुक्त नहीं है। उनका कहना है कि अदालत के आदेश का उद्देश्य ऐसा वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराना था, जहां लोगों को बिना किसी परेशानी के नमाज अदा करने की सुविधा मिल सके।
अब इस मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत सुनवाई होगी। अदालत यह तय करेगी कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया गया वैकल्पिक स्थल उसके पहले के आदेशों के अनुरूप है या नहीं। इस सुनवाई पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर भोजशाला परिसर से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर पड़ सकता है।
