देश में शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा घोटालों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब देश के कई राज्यों और शहरों तक पहुंच चुका है। इसकी शुरुआत दिल्ली के जंतर-मंतर से हुई थी, लेकिन अब दिल्ली, अहमदाबाद, पटना, लखनऊ, जयपुर, भोपाल, कोलकाता समेत कई शहरों में छात्र, अभिभावक, शिक्षक और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने भी आंदोलन का समर्थन किया है।
आंदोलन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया, जिसके बाद कई जगह धक्का-मुक्की और झड़प हुई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई लोगों को हिरासत में लिया।
इस दौरान सोशल मीडिया पर घायल छात्रों की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद आंदोलन को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई। कई लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।
घटना के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सामने आए। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया, जबकि सरकार ने आरोप लगाया कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।
संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठा। विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष पर छात्रों को राजनीतिक मोहरा बनाने का आरोप लगाया।
दिल्ली के अलावा अहमदाबाद में भी प्रदर्शन के दौरान करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। अन्य शहरों में भी रैलियां, धरने और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। जंतर-मंतर पर आंदोलन अब भी जारी है और आयोजकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
