ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच गुरुवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और सेना ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमले करने का दावा किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। ईरान का दावा है कि उसने कुवैत में तैनात अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, MQ-9 रीपर ड्रोन के डिपो और जॉर्डन में मौजूद THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) मिसाइल रक्षा प्रणाली के रडार को नष्ट कर दिया।
आईआरजीसी ने जारी बयान में कहा कि ये कार्रवाई हाल के दिनों में अमेरिका द्वारा ईरानी क्षेत्र पर किए गए लगातार हमलों के जवाब में की गई है। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया, जिसके बाद उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का फैसला लिया।
आईआरजीसी ने जॉर्डन की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उसके लड़ाकों ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक और तेज हमले किए। संगठन का दावा है कि जॉर्डन में अमेरिकी THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली का प्रमुख रडार पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। ईरान के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिका की क्षेत्रीय सैन्य क्षमता को कमजोर करना था।
वहीं कुवैत में ईरान ने अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ MQ-9 रीपर ड्रोन के रखरखाव और तैनाती केंद्र पर भी हमला करने का दावा किया है। ईरान का कहना है कि इन हमलों से अमेरिकी सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और कई महत्वपूर्ण सैन्य संसाधन नष्ट हो गए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका उसकी सीमा या हितों पर आगे भी हमले करता है तो जवाबी कार्रवाई और अधिक व्यापक तथा कठोर होगी। दूसरी ओर, क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए मध्य पूर्व के कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है, क्योंकि लगातार बढ़ता यह सैन्य टकराव पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
